विधान में कर्मों का चयन नहीं कर्मों का दहन होता है आर्यिका गुरु मति माताजी

धर्म

विधान में कर्मों का चयन नहीं कर्मों का दहन होता है आर्यिका गुरु मति माताजी
दमोह
दमोह में चल रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान के अंतर्गत धर्म सभा में आर्यिका 105 गुरुमति माताजी ने कहा कि विधान में कर्मों का चयन नहीं होता है, कर्मों का दहन होता है। कर्मों के दहन की प्रक्रिया से ही आत्मा को मुक्ति मिल सकती है।

 

 

 

उन्होंने कहा कि आज का मानव अपने प्राकृतिक स्वभाव को भूलकर विभाव में परिणत हो रहा है, एक उदाहरण के माध्यम से समझाते हुए कहा कि जिस तरह सूर्य पर बादलों का आवरण छा जाता है,

 

 

फिर भी उसका उदय होता है। कितने भी घने बादल हो, हमें रोशनी का एहसास होता है। इसी तरह आत्मा पर भी कर्मों का आवरण आ गया है। जिससे आत्मा की अनंत शक्तियां प्रकट नहीं हो पा रही। धार्मिक क्रियाओ से आत्मा के कर्म रूपी आवरण कम होते हैं।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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