श्री गिर्राज परिक्रमा में श्री रामदूत मित्र मंडल ने पेश की स्वच्छता की मिसाल, भक्ति के साथ दिया स्वच्छ भारत का संदेश
शोभायात्राओं के बाद सड़कों पर बिखरने वाले कचरे के बीच अनूठी पहल बनी प्रेरणा, गौमाता और पर्यावरण की सुरक्षा का भी दिया संदेश**
रामगंजमंडी।
धार्मिक आयोजनों में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। शोभायात्राएं हों या धार्मिक महोत्सव, श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ भाग लेते हैं। जगह-जगह स्वागत-सत्कार होता है और प्रसाद वितरण के साथ सेवा की परंपरा निभाई जाती है। लेकिन कई बार आयोजनों के बाद सड़कों पर बिखरे डिस्पोजल गिलास, कटोरियां और अन्य कचरा इस उत्सव की सुंदरता पर सवाल खड़े कर देते हैं। ऐसे में यदि धार्मिक आस्था के साथ स्वच्छता का संकल्प भी जुड़ जाए, तो यह समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण बन सकता है
रामगंजमंडी में गुरुवार को निकली ग्यारस की गिर्राज परिक्रमा यात्रा के दौरान बाजार नंबर एक स्थित श्री रामदूत मित्र मंडल ने स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी का ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। मंडल की ओर से किए गए सुव्यवस्थित प्रबंधन के चलते आयोजन स्थल पर स्वच्छता बनाए रखने की सराहनीय पहल देखने को मिली। धार्मिक सेवा के साथ स्वच्छता को प्राथमिकता देने का यह प्रयास समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश बनकर सामने आया।

### भक्ति के साथ स्वच्छता, सेवा का अनूठा संगम
प्रत्येक ग्यारस नगर में निकलने वाली गिर्राज परिक्रमा यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह स्वागत और सेवा के आयोजन होते हैं। इसी क्रम में बाजार नंबर एक स्थित तिरुपति स्टोन कंपनी के कार्यालय के बाहर श्री रामदूत मित्र मंडल की ओर से श्रद्धालुओं की सेवा की गई। इस दौरान श्रद्धा, आस्था और समर्पण के साथ स्वच्छता का ध्यान रखने की पहल भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।


मंडल की यह पहल बताती है कि धार्मिक आयोजन की भव्यता केवल सजावट, स्वागत और प्रसाद वितरण तक सीमित नहीं होती, बल्कि आयोजन के बाद आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाए रखना भी सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि प्रत्येक सामाजिक और धार्मिक संगठन इस भावना को अपनाए, तो नगर की सड़कों और सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने में बड़ी मदद मिल सकती है।

स्वच्छ भारत मिशन को जनभागीदारी से मिलेगी मजबूती
स्वच्छ नगर, स्वच्छ गली और स्वच्छ मोहल्ला केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। धार्मिक यात्राओं और शोभायात्राओं में उमड़ने वाली भीड़ के बीच कचरे का उचित प्रबंधन आवश्यक है। रामदूत मित्र मंडल की पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो दूसरे आयोजकों और सामाजिक संगठनों को भी प्रेरित कर सकती है।

गौमाता की सुरक्षा से भी जुड़ी है स्वच्छता
सड़कों पर फेंके जाने वाले प्लास्टिक और अन्य कचरे का दुष्प्रभाव बेजुबान पशुओं पर भी पड़ता है। अक्सर गौमाता और अन्य पशु भोजन के साथ प्लास्टिक निगल लेते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे में कचरे का उचित निस्तारण केवल स्वच्छता का विषय नहीं, बल्कि जीवों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है।

समाज के सामने एक सवाल, क्या हम भी लेंगे संकल्प?
श्री रामदूत मित्र मंडल की इस पहल से एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है—क्या हम अपने धार्मिक और सामाजिक आयोजनों को स्वच्छता का भी उदाहरण बना सकते हैं? क्या आयोजक कचरा संग्रहण की व्यवस्था करेंगे और क्या श्रद्धालु इस्तेमाल किए गए गिलास, कटोरियां एवं अन्य सामग्री निर्धारित स्थान पर डालने की जिम्मेदारी निभाएंगे?
यदि प्रशासन, आयोजक और आम नागरिक मिलकर यह संकल्प लें, तो हर शोभायात्रा और हर धार्मिक आयोजन स्वच्छता का उत्सव बन सकता है।
*श्री*रामदूत मित्र मंडल की पहल का संदेश स्पष्ट है—आस्था के मार्ग पर चलने के साथ अपने नगर को स्वच्छ रखना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।** ऐसी पहल का स्वागत होना चाहिए, ताकि रामगंजमंडी स्वच्छता, सेवा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में भी एक आदर्श स्थापित कर सके।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
