आचार्य श्री वीर सागर जी का विलयविलय समाधि दिवस आश्विन कृष्ण अमावस्या को श्रद्धा पूर्वक विभिन्न कार्यक्रम साथ मनाया जावेगा
सीकर
प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परपंरा के प्रथम पट्टाधीश आचार्य श्री वीर सागर जी का विलयविलय समाधि दिवस अमावश्या को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सान्निध्य में विशेष पूजन विनयांजलि सहित आचार्य धर्म सागर सभागृह दंग की नसिया में मनाया जावेगा। समाधिस्थ आचार्य श्री वीर सागर जी के चित्र समक्ष विशेष पूजन स्थापना,जल,चंदन, अक्षत, पुष्प , नैवेद्य ,दीप, धूप ,फल अध्र्य सहित अनेक द्रव्यों से पुण्यशाली ओर संघ के भैय्या दीदी द्वारा की जावेगी पूजन में अध्र्य के मंत्रोच्चार आचार्य श्री एवं साधुओं द्वारा किये जावेंगे आचार्य श्री साधुओं द्वारा समाधिस्थ आचार्य श्री वीर सागर जी की भावांजलि सभा होगी ।
डा राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री वीर सागर का पूर्व का नाम श्री हीरालाल गंगवाल ,का जन्म दिनांक 5 जुलाई 1876 को ईरग्राम में श्री रामसुख जी गंगवाल माताजी श्रीमती भाग्यवती के यहां हुआ।आप बाल ब्रह्मचारी होकर क्षुल्लक सन 1923 एवं मुनि दीक्षा दिनांक 25 अगस्त 1924 समडोली महाराष्ट्र में हुई प्रथमाचार्य दीक्षा गुरु आचार्य श्री शांति सागर जी के लिखित पत्र 26 अगस्त 1955 के अनुसार दिनांक 10 अगस्त 1955 खानियां जयपुर में आचार्य पद दिया गया।, आपने अनेक दीक्षा दी। आपकी जयपुर खानिया में समाधि आश्विन कृष्णा अमावस्या संवत् 2014 दिनांक 23 सितंबर 1957 को हुई । वर्तमान में आचार्य श्री वीर सागर जी से दीक्षित एक मात्र गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती जी संयम साधना रत हैं
