अन्तर्मना उवाच* (22 जून!)
*संसार से हमारे सम्बन्ध कैसे होने चाहिए-?*
हमने कहा — *हम सब यात्री हैं, हमारे सम्बन्ध नदी नाव जैसे होने चाहिये..!*
देर सवेर तो बिछड़ना ही है। *हर मिलन के क्षणों में विदाई को ना भूलें।* किसी से भी मिलो तो ध्यान रखना, कल बिछड़ना भी है। किसी से हाथ मिलाओ तो यह मत भूलो कि कल उसे अलविदा कहना है। *फूल खिले तो, खिले फूल में मुरझाये फूल को देख लेना।*
*परन्तु आज कल रिश्तों में रस नहीं बचा।* जरा सी एक गलत फहमी, अच्छे-खासे रिश्तों को भी तोड़ देती है। अब *आप ही सोचिये–? वो रिश्ता अच्छा कैसे हुआ, जो गलत फहमी से टूट जाये।* इसका मतलब हुआ कि वो गलती खोज रहा था रिश्ता तोड़ने के लिये–? *यदि रिश्ता* मजबूत होता या भावनात्मक होता, तो हजारों गलत फहमीयों से भी नहीं टूटता।

इसलिए —
*आज कल के कुछ रिश्तों में अनजान रहना ही अच्छा है..*
*कभी कभी सब कुछ जान लेना भी तकलीफ दायक हो जाता है…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेकजैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 99297 47312
