चारु कीर्ति स्वामी जी ने बहुत पहले से अपनी साधना को शुरू कर रखा था आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज

धर्म

चारु कीर्ति स्वामी जी ने बहुत पहले से अपनी साधना को शुरू कर रखा था आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने जैन मठ श्रवणबेलगोला तीर्थ के श्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी के जीवन कृतित्व पर प्रकाश डाला ।

    उन्होंने कहा भगवान श्री बाहुबली के परम भक्त श्री चारूकीर्ति भट्टारक स्वामी जी का आज समाधि मरण हो गया समाचार सुनकर के पूरा पिछला इतिहास स्मृति पटल पर घुमने लगा उन्होने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज की परम्परा को जो सम्मान दिया, उसी सम्मान पूर्वक उन्होने 3 महामस्तकाभिषेक वर्ष 1993, 2006, 2018 को अपने सानिध्य मे सम्पन्न कराया। उनका समाधीमरण होना सारी समाज के लिए दुखदाई है। ऐसी उम्मीद नही थी

पूज्य श्री ने कहा उन्होंने इस ऊचाईयो को महामस्तकाभिषेक के द्वारा प्राप्त कराया।सन 1981 मे एलाचार्य श्री विद्यानंदी जी महाराज के सानिध्य में सहस्त्र शताब्दी महोत्सव सम्पन्न कराया। यह उनके जीवन की बड़ी भारी उपलब्धि कही जा सकती है। उन्होने मस्तकाभिषेक को सम्पन्न कराके जो हर 12 वर्षो मे होता है जिनधर्म की भगवान् बाहुबली स्वामी की जो प्रभावना की उसे भुलाया नही जा सकता।

 

 

 

 

पूज्य श्री ने आगे कहा की स्वामीजी के लिए भगवान् श्री बाहुबली से प्रार्थना करते है उन्होने जिस प्रकार से श्रवणबैलगोला तीर्थ को विश्व प्रसिद्द की ऊचाईयो तक पहुचाने का प्रबल पुरुषार्थ किया

     

, वे भगवान् श्री बाहुबली के परम भक्त रहे है और उनकी भावना भी थी कि मै मुनि दीक्षा लेकर भगवान बाहूबली जेसी साधना कर सकू ऐसा मुझे आशीर्वाद दीजिये। वो संभव नहीं हो सका।

 

लेकिन हमको जहा तक ध्यान है उन्होने अपनी साधनाओ को बहुत पहले से शुरू कर रखा था और साधना के बल पर उन्होने जो अंतिम मरण को पाया। यह बात रही की वे अपने जीवन में सावधान रहे । जैन मठ श्री श्रवण बेलगोला के मनोनीत नूतन भट्टारक स्वामी को भी आशीर्वाद दिया
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिघि भक्त परिवार
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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