देवी अहिल्या गोशाला पहुंचे आचार्य सुनीलसागर जी महाराज, दिया गौवंश रक्षा और जीवदया का संदेश

धर्म

# देवी अहिल्या गोशाला पहुंचे आचार्य सुनीलसागर जी महाराज, दिया गौवंश रक्षा और जीवदया का संदेश

**‘मूक पशुओं की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य, प्लास्टिक बन रहा गौवंश के लिए जानलेवा’**

**इंदौर।** जैन संत आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज केसर बाघ रोड स्थित देवी अहिल्या गोशाला पहुंचे। यहां उन्होंने गौवंश की रक्षा, जीवदया, अहिंसा और पर्यावरण स्वच्छता का संदेश देते हुए समाज से मूक प्राणियों के प्रति करुणा और संवेदनशीलता रखने का आह्वान किया। आचार्यश्री ने कहा कि जीवदया ही सच्चे धर्म का आधार है और प्रत्येक जीव के प्रति प्रेम, करुणा एवं दयाभाव रखना मानव जीवन का महत्वपूर्ण कर्तव्य है।

 

 

 

## प्लास्टिक का कचरा बन रहा मूक पशुओं के लिए खतरा

आचार्यश्री ने सड़क पर प्लास्टिक एवं अन्य हानिकारक वस्तुएं नहीं फेंकने की अपील करते हुए कहा कि गाय और अन्य मूक पशु अक्सर कचरे के साथ प्लास्टिक खा लेते हैं, जिससे उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचता है और कई बार उनकी जान तक चली जाती है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को स्वच्छता के प्रति जागरूक रहते हुए गौवंश सहित सभी मूक प्राणियों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मूक पशु अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते। इसलिए उनके दर्द को समझना, उनकी रक्षा करना और उनके प्रति दयाभाव रखना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है।

## जीवदया और अहिंसा भारतीय संस्कृति के मूल संस्कार

आचार्यश्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गोमाता का विशेष स्थान रहा है तथा उनकी सेवा और रक्षा को पुण्य कार्य माना गया है। जैन धर्म का मूल सिद्धांत भी जीवदया और अहिंसा है, जो हमें प्रत्येक प्राणी के प्रति करुणा रखने तथा किसी भी जीव को कष्ट नहीं पहुंचाने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने संदेश दिया कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। जीवों के प्रति संवेदना, प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और मूक प्राणियों की रक्षा जैसे कार्य ही करुणा एवं अहिंसा की भावना को सार्थक बनाते हैं।

## मन का भ्रम दूर होगा, तभी मिलेगा समस्या का समाधान

प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने जीवन में निर्णय लेने की उलझन पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य अनेक विकल्पों और विचारों के बीच उलझा रहता है। कभी किसी बाजार में जाने का विचार आता है, तो कभी दूसरे बाजार में; कभी एक दुकान उचित लगती है, तो कभी दूसरी। अलग-अलग विकल्पों और कीमतों के बीच व्यक्ति कई बार निर्णय नहीं ले पाता।

आचार्यश्री ने समझाया कि जब तक मन का भ्रम दूर नहीं होगा, तब तक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना कठिन रहेगा। किसी भी समस्या का हल खोजने के लिए सबसे पहले मन को स्पष्ट करना, भ्रम से बाहर निकलना और उचित निर्णय लेना आवश्यक है।

**संदेश:** गौवंश की रक्षा, मूक प्राणियों के प्रति करुणा, स्वच्छता और जीवन में स्पष्ट निर्णय—आचार्यश्री के संदेश ने जीवदया के साथ-साथ दैनिक जीवन में जागरूकता और विवेक का महत्व भी बताया।

*जानकारी एवं संकलन: माही जैन धीरावत, पीपलखूंट, प्रतापगढ़।*

*प्रस्तुति: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी।*

 

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