दीक्षा लेंने का कोई समय निश्चित नहीं होता जब व्यक्ति की समझ जाग जाए तभी दीक्षा ले लेना चाहिये प्रमाण सागर महाराज मैं तो गुरु चरणों की धूल हूं निर्वेगसागर महाराज
इंदौर
संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागर महाराज के अवतरण दिवस शरदपूर्णिमा के अवसर पर 55 मिनट की वृहद शांतीधारा एवं मुनि श्री निर्वेग सागर महाराज का 28 वा दीक्षा दिवस मनाया गया तथा स्वास्थ्य रक्षक 24 मिनट का भावनायोग का शुभारंभ हुआ।
प्रातः6 बजे मोहताभवन में स्वास्थ लाभ के निमित्त से 24 मिनट का “भावनायोग” का शुभारंभ मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के मुखारविंद से किया गया जिसमें हजारों लोगों ने लाभ लिया।

धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया उपरोक्त भावनायोग लगातार तीन माह तक प्रतिदिन 6 बजे प्रातः प्रमाणिक ऐप के माध्यम से चलेगा जिसमें मुनि श्री के द्वारा समय समय पर सभी को निर्दशित भी किया जाएगा। भावनायोग के पश्चात शरदपूर्णिमा के अवसर पर विश्व में सर्वत्र शांती की भावना से वृहद शांतीधारा मुनि श्री के मुखारविंद से की गयी जो कि लगभग 55 मिनट की थी एवं आचार्य गुरुदेव विद्यासागर महामुनिराज की संगीतमय पूजन के साथ गुरुदेव के उपकार को याद किया गया। एवं वर्तमान आचार्य समयसागर महाराज को अर्घ समर्पित किया।एवं मुनि श्री निर्वेग सागर
महाराज के 28 वे दीक्षा दिवस पर गुरुदेव के उपकारों को याद करते हुये धर्मसभा में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा “दीक्षा जीवन के रूपांतरण के लिये अंतर्मन की एक घटना है,दीक्षा लेने का कोई समय निश्चित नहीं होता जब व्यक्ति की समझ जाग जाए तभी दीक्षा ले लेना चाहिये।
मुनि श्री ने कहा संसार के दुःख देखकर जिनको संसार से अरुचि होती है उनको ही वैराग्य के भाव उत्पन्न होते है,जिसको अभी
संसार में रस नजर आ रहा है,उनको दीक्षा के नाम से ही पसीना छूटता है” उन्होंने गुरू के प्रति आभार प्रकट करते हुये कहा कि सन्1988 में दीक्षा के पूर्व तीन साल तक में ब्रहम्चारीअवस्था में रहा गुरुदेव की शिक्षा का ही प्रभाव था कि मेरे मन में संसार से कर्म मुक्ति का भाव आया और जिन दीक्षा को ग्रहण करने के भाव हुये उन्होंने कहा कि “दीक्षा के संस्कार भले ही गुरु के द्वारा प्रदान किये जाते है, लेकिन उन व्रतों को निभाना शिष्य को ही पड़ता है”आज बहुत से ऐसे लोग है जो दीक्षा तो ले लेते है लेकिन उस प्रतिष्ठा को जी नहीं पाते, संत कहते है दीक्षा को लैने से ज्यादा महत्वपूर्ण दीक्षा को निभाना है उन्होंने कहा कि हम अपने आपको बहुत सौभाग्यशाली मानते है कि हमें ऐसे सदगुरू मिले जिन्होंने स्वं भी दीक्षा को जिया तथा अपने सभी शिष्यों को सामर्थ्यता प्रदान की, यह मत सोचना की दीक्षा मिल गई तो मोक्ष मिल गया अभी तो यह मोक्ष मार्ग की शुरुआत है, हम सभी उसके यात्री है, लक्ष्य भले ही बहुत दूर हो लेकिन हमें इस बात की संतुष्टि है कि कम से कम हम सही मार्ग पर हैं, मार्ग पर चलने से ही मंजिल मिलती है।
इस अवसर पर मुनि श्री निर्वेग सागर महाराज ने कहा” मैं
तो”गुरु चरणों की धूल हूं और उन्ही के चरणो में सन् 1997 में सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर में दस मुनिराजों के साथ तीसरे क्रम पर दीक्षा ली, गुरूजी के आशीर्वाद के साथ समाधिस्थ मुनिश्री प्रशांतसागर महाराज के साथ लगातार 22 वर्ष तक साधना की एवं चम्पापुरी में मुनि श्री की समाधि उपरांत सम्मेदशिखर जी में बड़े महाराज का सानिध्य मिला,मुनि श्री ने कहा कि “गुरु ने मुझे गुरु समय दिया लघु बनने” और बड़े महाराज ने जो वात्सल्य दिया उसी का परिणाम हे कि पिछला चातुर्मास श्री सम्मेद शिखर जी में साथ तथा दूसरा चातुर्मास निर्विकल्प होकर इंदौर में चल रहा है,और आप लोग आज उत्साह और आनंद से दीक्षा दिवस मना रहे है,उन्होंने कहा “संयम का मार्ग निर्भयता का मार्ग है,मिथ्यादृष्टि भी यदि संयम को धारण करता है तो वह भी अपना कल्याण कर लेता है।
इस अवसर पर मुनि श्री संघान सागर महाराज ने कहा कि आज के दिन श्री मंति की कोख से ऐसा चंद्रमा उदित हुआ था जिन्होंने संसार में अमृत को बरसायाऔर हम सभी पर ऐसी कृपा की।आचार्य श्री का हायकू है “दीक्षा ली जाती पद दिया जाता सो यथा” इस अवसर पर संघस्थ क्षुल्लक श्री आदर सागर, समादरसागर,चिद्रूपसागर,
स्वरूप सागर, तथा सुभग सागर ने दीक्षा दिवस के अवसर पर मुनित्रय की वंदना कर दीक्षालेने के भाव प्रकट किये।
इस अवसर पर बाहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। धर्म प्रभावना समिति के मीडिया प्रभारी राहुल जैन (स्पोर्ट्स) प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी,अध्यक्ष अशोक डोसी,नवीन गोधा आनंद गोधा,महामंत्री हर्ष जैन,मुकेश पाटौदी सहित समस्त पदाधिकारियों बाहर से पधारे अतिथियों का अभिनंदन किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
