राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला जीवन में स्वाभिमानी, आत्मविश्वासी एवं सिद्धांत वादी बने। मुनि श्रमण सागर जी

धर्म

राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला
जीवन में स्वाभिमानी, आत्मविश्वासी एवं सिद्धांत वादी बने। मुनि श्रमण सागर जी
राघौगढ़ 9 अक्टूबर।

 

दिगंबर जैन आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, महा तपस्वी, औजस्वी वक्ता मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने श्रमण धारा प्रवचन माला में राघौगढ़ नगर में आचार्य विद्यासागर भवन में मंगल प्रवचन करते हुए “जीवन में नमक जैसे बने” विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा नमक ऐसा पदार्थ है जिसके बिना भोजन अच्छा नहीं लगता। इसी प्रकार मिर्ची, शकर एवं आम भी प्रिय पदार्थ हैं मगर यह तीनों पदार्थ ऐसे हैं इनके बिना भी भोजन हो जाता है। मगर मिर्ची, शकर एवं आम स्वाद के लिए ज्यादा मात्रा में खाने से नुकसान हो जाता है। आपने यह भी कहा नमक के बिना हम रह नहीं सकते और नमक को ज्यादा खा भी नहीं सकते। मुनिराज ने आगे कहा वर्तमान में व्यापारिक, पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षणिक, कारपोरेट जगत, खेल जगत में हर व्यक्ति को यह भय सताता है कि उसे पद, जिम्मेदारी एवं ग्रुप से हटा न दिया जाए। आपने कहा स्वयं को नमक की तरह बना स्वयं में ऐसा प्रतिभाशाली बनाये कि आपको जिम्मेदारी से हटाने की सोचे भी नहीं। आपने महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लाला लाजपत राय जो कि जैन थे उनका उदाहरण देते हुए बताया उनका परिवार साधारण था उन्हें मित्रों के साथ पिकनिक पर जाना था टिफिन लेकर। मां ने कहा टिफिन में रखने के लिए खजूर के अलावा कुछ नहीं है। पिताजी ने कहा बेटा में पड़ोस से उधार लेकर तेरे टिफिन की व्यवस्था कर दूंगा। लाला लाजपत राय स्वाभिमानी थे उन्होंने अपने पिताजी से कहा आप स्वाभिमान बेचकर उधार न लाये। मैं टिफिन में अकेले खजूर लेकर जाऊंगा वह। खजूर लेकर गए और मित्रों से कहा कि मुझे वेध जी ने स्वास्थ्य खराब होने के कारण अकेले खजूर खाने का कहा है। आपने आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के अनमोल वचनों का उल्लेख करते हुए कहा अभिमान होना नहीं, स्वाभिमान खोना नहीं, स्वाभिमान रहित जीवन नर्क समान है। आपने आगे कहा जीवन में सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए। जीवन में जो नियम ले लिया है। उसे नियम को नहीं तोड़ना चाहिए। चाहे प्राण चले जाएं। महाराज जी ने महाभारत कालीन एकलव्य का उदाहरण देते हुए कहा गुरु द्रोणाचार्य ने मना कर दिया था कि मैं तुम्हें शिक्षा नहीं दूंगा। उसने आत्मविश्वास पूर्वक गुरु की मूर्ति लगाकर धनुर्विद्या सीखी। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने सभी को आव्हान किया कि जीवन में स्वाभिमानी, सिद्धांतों पर अडिग एवं आत्मविश्वासी बने। प्रवचन के समापन में कविता सुनाई शीर्षक है गुरु ने हमें जो चोला दिया है वह कभी मैला होता नहीं।

 

 

 

प्रवचन सभा में मंच संचालक विकास कुमार जैन ने जानकारी दी आगामी 26 अक्टूबर शरद पूर्णिमा के दिन आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार्य समय सागर जी महाराज का पावन दीक्षा दिवस राघौगढ़ में चातुर्मास में विराजमान मुनि श्रमण सागर जी, मुनि ओंकार सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में मनाया जाएगा। आगामी 2 नवंबर को राघौगढ़ में विद्या समय रत्न मुनि श्रमण सागर जी महाराज का पावन दीक्षा दिवस अनेक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाएगा।संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

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