# गिरनार जी से कुण्डलपुर होते हुए सम्मेद शिखर जी पहुंचे दो दर्जन साइकिल यात्री, 2200 किलोमीटर की आस्था और संकल्प से भरी यात्रा
**अहिंसा, शाकाहार, जल संरक्षण, बेटी बचाओ और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर निकले महाराष्ट्र के युवा; बड़े बाबा के दर्शन कर मुनि श्री समतासागर जी महाराज ससंघ का लिया मंगल आशीर्वाद**
**कुण्डलपुर/दमोह (मध्यप्रदेश)।**
आस्था जब संकल्प का रूप ले लेती है, तो कठिन रास्ते भी आसान हो जाते हैं। इसी दृढ़ विश्वास, साहस और धर्मभावना की प्रेरक मिसाल पेश करते हुए महाराष्ट्र के कोल्हापुर एवं सांगली जिले के चंदा बाबा साइकिल ग्रुप के दो दर्जन युवा साइकिल यात्रियों ने भगवान श्री नेमिनाथ की मोक्षस्थली गिरनार जी (गुजरात) से अपनी यात्रा प्रारंभ कर सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में विराजमान भगवान बड़े बाबा के चरणों में शीश नवाया। इसके बाद यात्रा को आगे बढ़ाते हुए 11 अक्टूबर को जैन धर्म के विश्वविख्यात तीर्थ सम्मेद शिखर जी पहुंचे। लगभग 2200 किलोमीटर की यह यात्रा धर्म, अध्यात्म, सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को समर्पित रही।
## बड़े बाबा के दर्शन कर लिया मंगल आशीर्वाद
कुण्डलपुर पहुंचने पर साइकिल यात्रियों ने भगवान बड़े बाबा के दर्शन, अभिषेक एवं पूजन का पुण्यलाभ प्राप्त किया। साथ ही निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ससंघ के मंगल दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज की तपस्थली कुण्डलपुर पहुंचकर सभी यात्रियों ने आध्यात्मिक ऊर्जा और धर्मलाभ का अनुभव किया।

प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर एवं सांगली जिले के युवाओं का यह साइकिल दल धार्मिक आस्था के साथ जनजागरण के उद्देश्य को लेकर निकला है। दल के सदस्य यात्रा के दौरान प्रतिदिन औसतन 150 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे।
## धर्म के साथ सामाजिक सरोकारों का संदेश
चंदा बाबा साइकिल ग्रुप के युवाओं की यह यात्रा केवल तीर्थदर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके माध्यम से समाज को कई महत्वपूर्ण संदेश भी दिए गए। यात्रियों ने **‘अहिंसा परमो धर्मः’, शाकाहार अपनाने, जल संरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, साइकिल चलाओ-ईंधन बचाओ और पर्यावरण बचाओ** जैसे संदेशों के प्रति लोगों को जागरूक किया। इसके साथ ही ‘इंडिया नहीं, भारत बोलो’ का संदेश भी प्रसारित किया।
साइकिल के माध्यम से लंबी दूरी तय करते हुए युवाओं ने यह संदेश दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और सामूहिक प्रयास से कठिन से कठिन लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी यह पहल युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करती है।
## गिरनार जी से सम्मेद शिखर जी तक आस्था का सफर
यात्रा का शुभारंभ 28 सितंबर 2026 को भगवान श्री नेमिनाथ की मोक्षस्थली गिरनार जी से हुआ। इसके बाद साइकिल यात्री विभिन्न पड़ावों से होते हुए कुण्डलपुर पहुंचे। यहां भगवान बड़े बाबा के दर्शन और मुनि श्री समतासागर जी महाराज ससंघ का आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात दल ने 6 अक्टूबर को अपनी अगली यात्रा प्रारंभ की।
11 अक्टूबर को दोपहर में साइकिल यात्री सम्मेद शिखर जी पहुंचे। इसके अगले दिन, 12 अक्टूबर को सभी यात्रियों ने पवित्र शिखर जी पर्वत की वंदना कर धर्मलाभ प्राप्त किया। सम्मेद शिखर जी जैन धर्म के 20 तीर्थंकरों की निर्वाणभूमि के रूप में विशेष धार्मिक महत्त्व रखता है। यहां पहुंचकर यात्रियों ने अपनी लंबी यात्रा के प्रमुख उद्देश्य को पूर्ण किया।
## जैन समाज ने जगह-जगह किया सहयोग
साइकिल यात्री जितेंद्र चौगुले ने बताया कि गिरनार जी, कुण्डलपुर और सम्मेद शिखर जी में उनके ठहरने की निःशुल्क व्यवस्था मिली। भोजन की व्यवस्था भी दल के साथ चलती है। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर जैन समाज के लोगों ने यात्रियों के आवास और भोजन की व्यवस्था के लिए आत्मीयता से आग्रह किया तथा सहयोग प्रदान किया।
उन्होंने बताया कि समाज के लोगों का यह स्नेह और सहयोग यात्रियों के उत्साह को बढ़ाने वाला रहा। धार्मिक स्थलों पर मिली सुविधाओं और रास्ते में मिले सहयोग ने लंबी यात्रा को सुगम बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
## पहले भी कर चुके हैं कई प्रेरक साइकिल यात्राएं
चंदा बाबा साइकिल ग्रुप के सदस्यों का साइकिल से तीर्थयात्रा और जनजागरण का सिलसिला पुराना है। वर्ष 2022 में इस समूह के 40 साइकिल यात्रियों ने कोल्हापुर से सम्मेद शिखर जी तक की यात्रा की थी। वर्ष 2024 में 20 साथियों ने कश्मीर के लाल चौक से कन्याकुमारी तक साइकिल यात्रा की थी। उस यात्रा के दौरान भी दल कुण्डलपुर पहुंचा था और सदस्यों ने पूज्य बड़े बाबा के दर्शन किए थे।
इसके अतिरिक्त समूह के सदस्य कोल्हापुर से श्रवणबेलगोला, दिल्ली और कन्याकुमारी तक भी साइकिल से यात्रा कर चुके हैं। समूह के सदस्य लगभग प्रतिवर्ष इस प्रकार की यात्राओं पर निकलते हैं। सड़क मार्ग पर अनुशासन के साथ दो कतारों में साइकिल चलाते हुए ये यात्री अपने धार्मिक संकल्प को पूरा करने के साथ समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने का कार्य करते हैं।
## युवाओं के लिए प्रेरणादायी बनी यात्रा
गिरनार जी से कुण्डलपुर और फिर सम्मेद शिखर जी तक की यह साइकिल यात्रा धार्मिक आस्था, शारीरिक परिश्रम, पर्यावरण जागरूकता और सामाजिक प्रतिबद्धता का अनूठा संगम बनी। महाराष्ट्र के इन युवाओं ने अपने प्रयासों से यह संदेश दिया कि तीर्थयात्रा केवल स्वयं के आध्यात्मिक कल्याण का माध्यम ही नहीं, बल्कि समाज में अच्छे विचारों और जनहित के संदेशों के

प्रसार का अवसर भी बन सकती है।
**संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी**


