सफल है, मगर मन में संतुष्टि नहीं है तो वह सफलता बेकार है। मुनि श्रमण सागर जी 

धर्म

सफल है, मगर मन में संतुष्टि नहीं है तो वह सफलता बेकार है। मुनि श्रमण सागर जी

राघौगढ़ 8 अक्टूबर।

इस युग के महान संत आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य महान तपस्वी, औजस्वी वक्ता, बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने राघौगढ़ नगर में जारी श्रमण धारा प्रवचन माला में आज “जीवन में संतुष्टि कैसे आए” इस विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा। आप जीवन के हर क्षेत्र में सफल हैं उस सफलता से आप संतुष्ट नहीं हैं तो उस सफलता का कोई मूल्य नहीं है। महाराज जी ने कहा पहले वे होते हैं जो सफल भी है और संतुष्ट भी हैं। इस श्रेणी में आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज आते हैं आचार्य आचार्य जी ने एक बार कहा था मैं अपनी धर्म साधना से सफलता की ओर बढ़ रहा हूं और संतुष्ट भी हूं। मुनिराज ने कहा दिगंबर जैन परंपरा में सुप्रसिद्ध दिगंबर जैन आचार्य कुंदकुंद स्वामी के बाद आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज ही त्याग और तपस्या के क्षेत्र में सर्वाधिक लोकप्रिय रहे हैं। आपने कहा दूसरी श्रेणी में वे आते हैं। जो असफल है और संतुष्ट हैं। इस श्रेणी में वे लोग आते हैं जिनका सोच यह होता है कि जो प्राप्त है वही पर्याप्त है। तीसरी श्रेणी में वे लोग आते हैं जो असफल भी हैं और असंतुष्ट भी हैं। इस श्रेणी में वे लोग आते हैं जो अपने निर्णय पर अडिग नहीं रहते हैं। और अपने निर्णय को बदलते रहते हैं। ऐसे लोग सफलता के लिए गलत तरीके अपनाते हैं। आपने कहा आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने कहा था अकबर बादशाह के प्रमुख दरबारी बीरबल थे जो ज्ञानवान थे। अकबर के दरबार में बीरबल की सलाह मानी जाती थी। आचार्य श्री ने कहा था जिंदगी दिमाग से नहीं किस्मत एवं पुरुषार्थ से चलती है। जिंदगी दिमाग से चलती होती तो बीरबल ही बादशाह होता। आपने कहा चौथे प्रकार के वे लोग होते हैं जो सफल हैं संतुष्ट नहीं है। इस श्रेणी में हम रिलायंस समूह के उपाध्यक्ष प्रताप शाह को देख सकते हैं जिन्हें कंपनी द्वारा 75 करोड़ का पैकेज दिया जाता था। मगर उन्होंने संतुष्टि नहीं होने के कारण रिलायंस का काम छोड़कर दीक्षा ली।

 

मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा जीवन में संतुष्टि नहीं मिलती है तो सफलता का कोई महत्व नहीं है। जीवन में बुरे काम करोगे तो संतुष्टि नहीं मिलेगी। वह काम करो जिससे संतुष्टि मिले। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने प्रवचन के अंत में आपके द्वारा दो दिन पूर्व लिखित कविता सुनाई कविता का शीर्षक है अब तो जी रहा हूं बस स्वतंत्र होने के लिए।

 

 

कार्यक्रम संयोजक विकास कुमार जैन ने धर्म सभा में उल्लेख किया कि मुनि श्रमण सागर जी एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में दस लक्षण पर्व पर राघौगढ़ में आयोजित श्रमण संस्कार शिविर में राघौगढ़ एवं साडा कॉलोनी की जिन माता बहनों ने भाग लेकर धर्म साधना की थी। उनको प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान आगामी 11 अक्टूबर रविवार को प्रातः 9:30 बजे मुनि संघ के पावन सानिध्य में जैन समाज के यशस्वी अध्यक्ष सिंघई अशोक कुमार भारिल्य के नेतृत्व में किया जाएगा।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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