विनयवान होना ही सज्जनता का प्रतीक है प्रणम्य सागर महाराज

धर्म

विनयवान होना ही सज्जनता का प्रतीक है प्रणम्य सागर महाराज
जयपुर
अर्हम योग प्रणेता मुनि श्री 108प्रणम्य सागर महाराज के श्री मुख से मानसरोवर के मीरा मार्ग स्थित आदिनाथ भवन में पार्श्वनाथ कथा का आयोजन हो रहा है।

 

 

मंगलवार की बेला में भगवान पार्श्वनाथ के जीवन का सजीव मंचन हुआ जिसे देखकर मौजूद भक्त आनंदित हो उठे। महाराज श्री द्वारा कथा का श्रवण कराते हुए भगवान पार्श्वनाथ के 10 भव पहले मरुभूति का शीला पर पटक कर वध करने का प्रसंगसुनाया। कथा के दौरान संजीव पात्रों ने मनमोहक अभिनय करके मौजूद भक्तों का मन मोह लिया।

महाराज श्री ने कहा कि विनयवान होना ही सज्जनता का प्रतीक है।

 

 

 

जिस तरह विज्ञान में क्यों, कैसे के जवाब ढूंढे जाते हैं, इस तरह से धर्म के बारे में क्यों, कैसे के बारे में जानना चाहिए। दुर्जन व्यक्ति की संगति से बचना चाहिए। सरलता सरल लोगों के साथ बढ़ती है। उन्होंने दुर्जन की तुलना कफ़ रोग से की और कहा कि जिस तरह से कफ रोग में मीठा खाने से रोग में बढ़ोतरी होती है, वैसे ही दुर्जन व्यक्ति से मीठा बोलने से उसकी दुर्जनता बढ़ती है। इस अवसर पर महाराज श्री द्वारा मौजूद भक्तों को अर्हम ध्यान योग के अंतर्गत अरिहंत परमेष्ठी का ज्ञान करवाया गया।

 

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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