विदेश में फिर लहराया तिरंगा, रामगंजमंडी की ‘गोल्डन गर्ल’ गौरांशी शर्मा ने रचा इतिहास
एशिया पैसिफिक डेफ बैडमिंटन चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक, भारत का गौरव बढ़ाया; शहर में खुशी की लहर
रामगंजमंडी।
रामगंजमंडी की बेटियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। शहर की ‘गोल्डन गर्ल’ गौरांशी शर्मा ने मलेशिया के पेनांग में आयोजित एशिया पैसिफिक डेफ बैडमिंटन चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। गौरांशी की इस उपलब्धि के साथ एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा शान से लहराया और देश का गौरव बढ़ा।
गौरांशी की इस सफलता की खबर जैसे ही रामगंजमंडी पहुंची, शहर में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने इसे केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि रामगंजमंडी की बेटी की अंतरराष्ट्रीय पहचान और पूरे शहर के गौरव का क्षण बताया।
टोक्यो की हार का मलेशिया में लिया हिसाब
गौरांशी की इस सफलता को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि कुछ माह पहले टोक्यो, जापान में आयोजित डेफ ओलंपिक में जापान के खिलाफ भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा था। अब मलेशिया में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जापान को हराकर उस हार का हिसाब बराबर कर दिया।
इस जीत ने गौरांशी सहित भारतीय खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है।
2022 में ब्राजील में जीता था ऐतिहासिक स्वर्ण
गौरांशी शर्मा का अंतरराष्ट्रीय सफर पहले भी देश को गौरवान्वित कर चुका है। 5 मई 2022 को ब्राजील में आयोजित डेफ ओलंपिक 2022 में गौरांशी ने बैडमिंटन में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। इसके बाद से ही वह रामगंजमंडी सहित देशभर में अपनी प्रतिभा के लिए पहचान बना चुकी हैं।
जिस घर में जन्मी, वहीं से शुरू हुई गौरांशी की स्वर्णिम कहानी
गौरांशी का रामगंजमंडी से रिश्ता केवल उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। शहर के बाजार नंबर-6 में स्थित ‘श्रीकृपा’ आवास उनकी जन्मभूमि है। इसी घर से निकलकर गौरांशी ने अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में अपनी पहचान बनाई।

जब वह वर्ष 2022 में स्वर्ण पदक जीतकर रामगंजमंडी लौटी थीं, तब जन्मभूमि पहुंचने पर उनका पटाखों की गूंज और फूलों की वर्षा के साथ भव्य स्वागत किया गया था। गौरांशी ने अपनी जन्मभूमि को नमन करने के साथ घर के मंदिर में विराजित अपने इष्ट प्रभु के दर्शन कर आशीर्वाद लिया था। उस समय का भावुक दृश्य आज भी शहरवासियों की स्मृतियों में ताजा है।
आज एक बार फिर उसी बेटी ने विदेश की धरती पर स्वर्ण जीतकर रामगंजमंडी का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
गौरांशी की कहानी जितनी गौरवपूर्ण, उतनी ही प्रेरणादायक
गौरांशी की सफलता के पीछे संघर्ष और परिवार की प्रेरणा की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। गौरांशी के पिता गौरव शर्मा और माता प्रीति शर्मा जन्म से ही मूकबधिर हैं। इसके बावजूद परिवार ने गौरांशी के सपनों को उड़ान देने में कोई कमी नहीं छोड़ी।
गौरांशी के पिता गौरव शर्मा वर्तमान में भोपाल में रहते हैं। शिक्षा के लिए भी उन्हें भोपाल में रहना पड़ा। गौरांशी की दादी हेमलता शर्मा रामगंजमंडी नगर पालिका की अध्यक्ष रह चुकी हैं।
गौरांशी का परिवार मध्यप्रदेश के अशोकनगर से भी गहरा जुड़ा रहा है। उनके परदादा स्वर्गीय बाबूलाल शर्मा अशोकनगर के प्रतिष्ठित कपड़ा व्यापारियों में रहे और लंबे समय तक हनुमान मंदिर धर्मशाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भी रहे। बाद में गौरांशी के दादा प्रमोद कुमार शर्मा कोटा स्टोन के व्यवसाय के सिलसिले में रामगंजमंडी आए और यहीं परिवार का जुड़ाव मजबूत हुआ।
एक बेटी, जिसने रामगंजमंडी को दी अंतरराष्ट्रीय पहचान
गौरांशी शर्मा की कहानी उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा है जो परिस्थितियों से आगे बढ़कर अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं। उन्होंने बार-बार साबित किया है कि मेहनत, प्रतिभा और हौसले के सामने कोई चुनौती बड़ी नहीं होती।
मलेशिया की धरती पर स्वर्ण पदक जीतकर गौरांशी ने एक बार फिर भारत का तिरंगा ऊंचा किया है। उनकी इस शानदार उपलब्धि पर रामगंजमंडी गर्व कर रहा है और शहरवासियों की जुबां पर एक ही बात है—“हमारी गोल्डन गर्ल ने फिर कर दिखाया।”
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312





