बूचड़खाने बंद करो, पशु-पक्षियों पर दया-भाव रखो : मुनिश्री योगसागर महाराज
सामूहिक क्षमावाणी समारोह में गूंजा अहिंसा और जीवदया का संदेश, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा—भगवान महावीर का अहिंसा-करुणा का मार्ग आज भी प्रासंगिक
कोटा।
क्षमा केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन जीने की ऐसी भावना है, जिसमें प्रत्येक जीव के प्रति करुणा, दया और अहिंसा का भाव समाहित हो। समाज में बढ़ती हिंसा और मांसाहार के बीच जीवदया का संदेश देते हुए ज्येष्ठ मुनिश्री 108 योगसागर महाराज ने बूचड़खाने बंद कराने और पशु-पक्षियों के प्रति दया-भाव अपनाने का आह्वान किया।
आरोग्य नगर स्थित जैन जन उपयोगी भवन में रविवार को दिगम्बर जैन समाज की ओर से सामूहिक क्षमावाणी समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ज्येष्ठ मुनिश्री 108 योगसागर महाराज, मुनिश्री 108 विवर्धन सागर महाराज एवं मुनिश्री 108 प्रणव सागर महाराज ससंघ का सान्निध्य प्राप्त हुआ।
समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं विधायक संदीप शर्मा एवं विधायक कल्पना देवी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। समाज की ओर से सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।

शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
समारोह से पूर्व दोपहर 2 बजे आरकेपुरम से आरोग्य नगर तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। रथ में जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा को विराजमान किया गया। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर धर्म और अहिंसा का संदेश जन-जन तक पहुंचाया।
मुनिश्री योगसागर महाराज ने दिया जीवदया का संदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए ज्येष्ठ मुनिश्री 108 योगसागर महाराज ने कहा कि अहिंसा धर्म को आत्मसात करना ही समस्त जीवों के प्रति क्षमा, करुणा और दया का भाव रखना है। क्षमावाणी तभी सार्थक होगी, जब हमारे व्यवहार में जीवों के प्रति करुणा दिखाई दे।
उन्होंने समाज में बढ़ते मांसाहार पर चिंता व्यक्त करते हुए जीवदया की भावना अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के पास जब अनेक नेता आते थे, तब वे उनसे कहते थे कि कत्लखाने बंद करवाओ और जीवों को बचाने का काम करो। जीव रक्षा और अहिंसा के प्रति यही जागरूकता क्षमा भाव को सार्थक बनाती है।
क्षमा को जीवन और व्यवहार में उतारना जरूरी : विवर्धन सागर
मुनिश्री 108 विवर्धन सागर महाराज ने कहा कि दशलक्षण महापर्व की पूर्णता तभी है, जब क्षमा धर्म को केवल पर्व तक सीमित न रखकर जीवन और व्यवहार में उतारा जाए। क्षमा मनुष्य के भीतर की कटुता और द्वेष को दूर कर आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।
भगवान महावीर का संदेश पूरी मानवता के लिए : ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विश्व शांति और मानवता के कल्याण के लिए भगवान महावीर स्वामी के बताए अहिंसा, करुणा और क्षमा के मार्ग पर चलना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पूज्य मुनिश्री योगसागर महाराज एवं मुनिश्री विवर्धन सागर महाराज के सान्निध्य में भगवान महावीर स्वामी के विचारों और उनके संदेश को स्मरण करने का अवसर मिला।
बिरला ने कहा कि भगवान महावीर ने सत्य, अहिंसा, संयम और क्षमा का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज आज सशरीर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, तप और त्याग से मिली प्रेरणा संतों और समाज के माध्यम से निरंतर लोगों तक पहुंच रही है।
उन्होंने कहा कि क्षमावाणी केवल एक दिन क्षमा मांगने का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने विचारों और व्यवहार में क्षमा को स्थान देने का संदेश देती है। मन में कटुता, द्वेष और शत्रुता रखने से सबसे अधिक अशांति स्वयं मनुष्य को होती है। क्षमा मन को शांत और निर्मल बनाती है तथा जीवन में धैर्य और सहजता लाती है।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के विचार किसी एक समाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए हैं। इस पावन अवसर पर सभी से उत्तम क्षमा मांगते हुए उन्होंने कहा कि वे प्रयास करेंगे कि क्षमा, संयम और अहिंसा उनके विचार एवं कर्म का हिस्सा बने रहें।
तपस्वियों और प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान
समारोह के दौरान दशलक्षण महापर्व में कठिन तप-साधना करने वाले एक दर्जन से अधिक उपवासकर्ताओं का सम्मान किया गया। इसके साथ ही विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पांच दर्जन से अधिक प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर मंथन सोशल ग्रुप की ओर से रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया, जिसमें लोगों ने उत्साहपूर्वक 



भाग लेकर सेवा और मानवता का संदेश दिया।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

