छोटी भूल याद रखकर हमने बड़ी भूल की, स्वीकारोक्ति का भाव ही क्षमावाणी : आचार्य प्रसन्न सागरजी
पुष्पगिरी तीर्थ सोनकच्छ।
क्षमावाणी पर्व के अवसर पर आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने उपस्थित गुरु में भक्तों को क्षमा, मैत्री और आत्मशुद्धि का संदेश दिया।
आचार्य श्री ने कहा कि “उसने छोटी भूल की, हमने उसे याद रखकर बड़ी भूल की। उस भूल को स्वीकार करने का भाव ही क्षमावाणी है।” उन्होंने कहा कि गुरु और प्रभु की वरदानी छांव में सकल संघ आनंदित एवं प्रसन्नचित्त है। क्षमावाणी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि मन में वर्षों से जमा वैर, कटुता और शिकायतों की गांठों को खोलकर आत्मा को सरल एवं निर्मल बनाने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि क्षमा का भाव मनुष्य को दुःख से बचाने वाला, सुख-सौभाग्य को बढ़ाने वाला और मन की गांठों को खोलने वाला है। इस पावन अवसर पर अपने एवं अपरिचित सभी लोगों से मुझ अकिंचन की निश्छल मन, वचन और काय से विनम्र विनती है कि मुझ पर एवं सकल संघ पर क्षमा का भाव रखें। यही मेरे मन की अभिव्यक्ति और भावना है।
अहर्निश बना रहे आत्मशुद्धि का भाव
आचार्य श्री ने कहा कि आत्मशुद्धि, भाव विशुद्धि एवं सहज स्वभाव के लिए क्षमा, मैत्री और अहिंसा का चिंतन प्रतिपल बना रहना चाहिए। उन्होंने श्रावकों को क्षमावाणी के मूल भाव को जीवन में उतारने का संदेश देते हुए कहा कि मन में किसी के प्रति वैर का भाव नहीं होना चाहिए।
उन्होंने क्षमावाणी की भावना को इन पंक्तियों के माध्यम से व्यक्त किया—
“खम्मामि सव्व जीवेषु,
सव्वे जीवा खमन्तु मे।
मित्ति मे सव्व भूएसु,
वेरं मज्झं न केणवि॥”
अर्थात—मैं सभी जीवों को क्षमा करता हूं, सभी जीव मुझे क्षमा करें। सभी जीवों के प्रति मेरा मैत्री भाव बना रहे और किसी के प्रति मेरा वैर भाव न हो।
आचार्य श्री ने कहा कि क्षमा मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मबल का प्रतीक है। जब मनुष्य अपनी भूल स्वीकार करता है और दूसरों की भूल को भूलकर आगे बढ़ता है, तभी जीवन में सहजता, शांति और मैत्री का भाव स्थापित होता है।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने क्षमावाणी पर्व के संदेश को आत्मसात करते हुए परस्पर “मिच्छामि दुक्कडम्” कहकर एक-दूसरे से क्षमा याचना की और सभी जीवों के प्रति मैत्री भाव रखने का संकल्प लिया।
सबसे क्षमा, सबको क्षमा—यही क्षमावाणी का संदेश
इस संबंध में प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा एवं पीयूष कासलीवाल, औरंगाबाद ने जानकारी देते हुए बताया कि पुष्पगिरी तीर्थ में आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय श्री पीयूष सागरजी महाराज के सान्निध्य में धार्मिक गतिविधियां निरंतर भक्तिभाव के साथ संपन्न हो रही हैं। क्षमावाणी पर्व के संदेश ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, क्षमा, मैत्री और भावविशुद्धि की प्रेरणा दी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312















