शुभ दिन और सुख के दिनों को तीर्थ क्षेत्र पर व्यतीत करना चाहिए–मुनि पुंगव श्री सुधासागर महाराज

धर्म

शुभ दिन और सुख के दिनों को तीर्थ क्षेत्र पर व्यतीत करना चाहिए–मुनि पुंगव श्री सुधासागर महाराज
आगरा –
-शुभ दिन और सुख के दिन मंदिरो में, तीर्थक्षेत्रों में और गुरुओ के पास व्यतीत करना चाहिए। आपके लिए नयावर्ष शुभ दिन है या अशुभ दिन, शुभ दिन मानते हो तो नए वर्ष का दिन नियम से अपने भगवान के पास अपने गुरुओं के पास, तीर्थक्षेत्र पर व्यतीत करना है। यदि इसे मांगलिक करना है कोई भी व्यक्ति नए वर्ष पर अपने घर में अपने मां परिवार के हाथ का भोजन करें इस दिन होटलो में भोजन नही करेगा, कैटेरो के हाथ का नही करेगा, अपने माँ के, पत्नी के हाथ का ही भोजन करेगा, अपने घर मे करेगा, अपने घर परिवार के लोगो के बीच मे करेगा। जो शुभ दिन पर अपने घर में भोजन करता है जाओ कभी उसके घर मे अन्न की कमी नही आएगी, उसको ऐसी बीमारी नही आएगी कि वो अन्न खाने लायक ही नही रहेगा यह बात छीपीटोला में जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम में पूज्य मुनि श्री सुधा सागर महाराज ने कही।

 

 

 

 

होटल गार्डन कभी मंगलरुप नहीं हो सकते

महाराज श्री ने कहा कि होटल, गार्डन, हिल स्टेशन कभी मंगल रूप नही हो सकती, मांगलिक होता है तीर्थक्षेत्र, मन्दिर, अपना परिवार, तुम्हारे माँ-बाप। इस दिन उनके बीच मे रहो, उनके साथ रहो, तुम्हारा परिवार अखण्ड होगा, कभी टूटेगा नही, घर उजड़ेगा नही क्योंकि शुभ दिन पर पूरे दिन घर मे रहे, एक साथ खाया पिया।

 

 

पिच्छिका परिवर्तन के समय का कोई निश्चित नहीं होता
उन्होंने कहा कि पिच्छी परिवर्तन के समय का कोई भी प्रावधान आगम में नही है। पहले साधु जंगलो में रहा करते थे तो पुराने पंख तोड़कर निकल जाते थे, नए पंख लगा लेते थे। मयूर क्वार के महीने में दिवाली के पहले, दशहरा के बीच मे ये 15 दिन होते है, इन दिनों में मयूर अपने पँखो को स्वतः छोड़ती है, निकाले नही जाते है तो वे छोड़े हुए पंख दीवाली पर सहजता से उपलब्ध हो जाते हैं उन्होंने कहा कि बरसात, सर्दी, गर्मी आदि में भीग जाते है तो कठोर हो जाते है, लगाते लगाते डण्ठल हो जाते है तो जीवो को चुभते है इसलिए पिच्छिका परिवर्तित करते है। एक ऐसा इष्ट गुरु बनाओ जिसका चेहरा बिना मेहनत के संकट के समय एकायक देखने मे आ जाये।

 

 

 

 

 

इष्टगुरु को जब हम सुबह शाम अच्छे कार्यो में याद करते है, तो हमारा कनेक्सन आराध्य से जुड़ जाता है, उसकी एनर्जी हमारे जीवन से सम्बन्ध रखती है और जितने पावर की एनर्जी होगी वो उतने बड़े संकट से बचा भी लेती है, बचाती ही है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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