जीवन के विकास के लिए रीती नीति का ज्ञान होना आवश्यक है विशुद्ध सागर महाराज

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जीवन के विकास के लिए रीती नीति का ज्ञान होना आवश्यक है विशुद्ध सागर महाराज
उज्जैन
जीवन के विकास के लिए रीती नीति का ज्ञान होना आवश्यक है रीति नीति से शून्य व्यक्ति निग्रही संकटों से घिर जाता है। रीति नीति का ज्ञाता सर्वत्र सफलता को प्राप्त करता है। सफल समृद्ध सुखी जीवन के लिए समन्वय दृष्टि आवश्यक है। परस्पर संधि से बड़े-बड़े युद्ध भी टाले जा सकते हैं।

 

आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने ग्रीष्मकालीन वाचना में उद्बोधन देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा छोटे से छोटे शत्रु से भी सावधान रहना चाहिए। ऐसा ही रोग थोड़ा भी हो तो उसका भी उपचार करना चाहिए। थोड़ा भी विष यदि भोजन में हो तो नहीं करना चाहिए। छोटा सा दोस्त भी हमारे जीवन को कलंकित कर देता है। दोस्त छोटा भी हो उसकी उपेक्षा नहीं करना चाहिए। छोटा रोग, छोटा शत्रु, और थोड़ा सा प्रमाद विनाश का कारण बन जाता है। कार्य सिद्धि के लिए रंग अंतरंग दोनों ही निमित्त आवश्यक है। विशुद्ध के साथ की गई क्रिया सफलता का समर्थ साधन है। साधनों से ही कार्य की सिद्धि संभव है। जैसा साधन होगा वैसा कार्य होगा। स्वयं की ज्ञान शक्ति सामर्थ के अनुसार कार्य करना चाहिए हीन भावना एवं चिंता की चिता से स्वयं की रक्षा करना चाहिए।

आचार्य श्री ने कहा कि विशुद्ध बनना है तो अशुद्धता से बचो , सुखद जीवन जीना है तो ईर्ष्या मत करो। जिन विद्यार्थियों को अपने ज्ञान की वृद्धि करना है,जीवन में उत्कर्ष प्राप्त करना है,सफलता प्राप्त करना है, बुद्धि को प्रांजल करना है, उनको प्रयत्नपूर्वक अपने चरित्र एवं भावों की पवित्रता रखना चाहिए।

महाराज श्री ने कहा चरित्रवानो के चित्र दर्शन से जीवन में संस्कार विशुद्धता प्राप्त होती है। शुद्ध व विशुद्ध होना है तो अशुद्धता से बचो। कषाय की एक कनिका जीवन को कलंकित कर देती हैं।पुण्य के योग में शत्रु भी मित्र बन जाता है।धन बल, प्रज्ञा बल, सैन्य बल, बाहुबल तभी कार्यकारी होता है,जब पुण्य बल प्रबल होता है।

पुण्य आत्मा के द्वार पर देव भी रत्न वृष्टि करते हैं। पुण्य के प्रभाव से जंगल में भी मंगल हो जाता है। सुखद जीवन जीना है तो ईर्ष्या मत करो। अपना पुण्य बढ़ाओ, पुण्य आत्मा वाला ही बलवान होता है। पुण्य के प्रभाव से अग्नि नीर बन जाती है। विनय मानव की कुल विधा है। विनयशील मनुष्य सभी का प्रिय होता है, विनय से विद्या प्राप्त होती है। विनय मुक्ति का द्वार है, विनय सज्जनों का श्रृंगार है।विनय वन की सीढ़ियां को प्राप्त करता है।

    संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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