वोट के बाद शुरू हुई ‘भ्रमण पॉलिटिक्स’, बाड़े में बंद पार्षदों की बढ़ी हलचल
कांग्रेस-भाजपा ने अपने-अपने पार्षदों की कराई बाड़ाबंदी, कोई पहुंचा धार्मिक स्थल तो किसी को कराया जा रहा पर्यटन
रामगंजमंडी।
नगरपालिका चुनाव में मतदान की प्रक्रिया पूरी होते ही अब राजनीतिक दलों की असली रणनीति सामने आने लगी है। मतदाताओं ने अपना फैसला ईवीएम में बंद कर दिया है, लेकिन राजनीतिक दलों की चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। अब नजरें पार्षदों को सुरक्षित रखने और बोर्ड बनाने के लिए जरूरी आंकड़े जुटाने पर टिक गई हैं।
रामगंजमंडी नगरपालिका चुनाव में मतदान के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी शुरू कर दी है। प्रत्याशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाकर उनके रहने और घूमने-फिरने की व्यवस्था की जा रही है। चुनावी तनाव के बीच अब प्रत्याशी राजनीतिक चर्चाओं से दूर सैर-सपाटे और धार्मिक यात्राओं का आनंद लेते नजर आ रहे हैं।

महिला प्रत्याशियों के साथ परिवार भी
बाड़ाबंदी के दौरान महिला प्रत्याशियों का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उनके साथ पति और बच्चों को भी यात्रा में शामिल किया गया है। परिवार के साथ रहने से प्रत्याशियों को चुनावी तनाव से दूर कुछ समय आराम और मनोरंजन का अवसर मिल रहा है।
कांग्रेस प्रत्याशी पहुंचे झालावाड़, कामखेड़ा बालाजी के किए दर्शन
कांग्रेस प्रत्याशियों ने गुरुवार को झालावाड़ में ठहराव किया। इसके बाद शुक्रवार को उन्हें प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कामखेड़ा बालाजी ले जाया गया। यहां प्रत्याशियों ने दर्शन-पूजन कर भगवान का आशीर्वाद लिया और अपनी जीत की कामना की।
चुनावी परिणाम से पहले धार्मिक स्थलों की इस यात्रा को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। प्रत्याशी जहां इसे आस्था और परिवार के साथ समय बिताने से जोड़ रहे हैं, वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे बोर्ड बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भाजपा के प्रत्याशियों का भी जारी है भ्रमण
इधर भाजपा ने भी अपने प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने के लिए बाड़ाबंदी की है। जानकारी के अनुसार भाजपा प्रत्याशियों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है।
बाड़ाबंदी के दौरान प्रत्याशियों के लिए रहने, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। चुनावी भागदौड़ के बाद प्रत्याशी अब सैर-सपाटे के बीच परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।
14 सितंबर को खुलेगा ईवीएम में बंद किस्मत का राज
अब सभी की नजरें 14 सितंबर की मतगणना पर टिकी हैं। इसी दिन रामगंजमंडी नगरपालिका के 39 वार्डों के परिणाम सामने आएंगे और पता चलेगा कि जनता ने किसे अपना प्रतिनिधि चुना है।
लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद भी राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं होगी। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाने के लिए दोनों दलों को अपने पार्षदों के साथ-साथ निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की भी जरूरत पड़ सकती है।
यही कारण है कि मतदान खत्म होते ही पार्षदों की बाड़ाबंदी को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
निर्दलीय बन सकते हैं ‘किंगमेकर’
रामगंजमंडी सहित हाड़ौती के निकाय चुनावों में कई बार निर्दलीय पार्षद सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखते आए हैं। पिछले चुनाव में भी निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी।
इस बार भी बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक सेंधमारी का जोखिम नहीं उठाना चाहते।
यही वजह है कि मतदान के तुरंत बाद प्रत्याशियों को एकजुट रखने और सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कवायद शुरू हो गई।
असली ‘खेल’ मतगणना के बाद शुरू होगा
अभी प्रत्याशी घूम रहे हैं, राजनीतिक दल रणनीति बना रहे हैं और समर्थक जीत के दावे कर रहे हैं। लेकिन असली राजनीतिक खेल 14 सितंबर के बाद शुरू होगा।
किस दल के कितने पार्षद जीतकर आते हैं, कितने निर्दलीय मैदान मारते हैं और निर्दलीयों का रुख किस ओर होता है—इन्हीं समीकरणों से नगरपालिका के बोर्ड की तस्वीर तय होगी।
14 सितंबर को नतीजे सामने आएंगे और 21 सितंबर को अध्यक्ष-उपाध्यक्ष को लेकर तस्वीर साफ होगी। ऐसे में अगले कुछ दिन रामगंजमंडी की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन जीतेगा?
बल्कि बड़ा सवाल यह है कि जीत के बाद बोर्ड किसका बने
गा और नगरपालिका की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी?





