संतों ने भी लिया संकल्प, बोले—उपवास केवल धर्म नहीं, स्वास्थ्य, संयम और आत्मनियंत्रण का मार्ग

धर्म

 

 

संतों ने भी लिया संकल्प, बोले—उपवास केवल धर्म नहीं, स्वास्थ्य, संयम और आत्मनियंत्रण का मार्ग

अंतर्मना प्रसन्न सागर जी बोले—परिवार की निरोगता और देश की खुशहाली के लिए हर मास एक उपवास जरूर करें

पुष्पगिरी तीर्थ, सोनकच्छ।
पुष्पगिरी तीर्थ की पावन धरा पर उस समय इतिहास रच गया, जब हजारों लोगों ने एक साथ ‘हर मास एक उपवास’ अभियान से जुड़ते हुए प्रत्येक माह एक दिन उपवास करने का संकल्प लिया। संतों, धर्माचार्यों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने अभियान को व्यापक जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

 

 

 

कार्यक्रम में न केवल उपवास का संकल्प लिया गया, बल्कि वाणी संयम, इंद्रिय नियंत्रण और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया गया। इसी अवसर पर तीर्थ पहाड़ी पर पीपल, बरगद और नीम के त्रिवेणी संगम का पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

‘पहले खुद से शुरुआत करनी होगी’—चित्रा त्रिपाठी

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता एबीपी न्यूज की वरिष्ठ पत्रकार एवं समाचार एंकर सुश्री चित्रा त्रिपाठी ने कहा कि जब तक हम स्वयं से शुरुआत नहीं करेंगे, तब तक दूसरों को उपदेश देना उचित नहीं है। हम एकादशी सहित विभिन्न व्रत धर्म के लिए करते हैं, लेकिन अपने स्वास्थ्य और आत्मसंयम के लिए उपवास करने की प्रेरणा उन्हें गुरुदेव से मिली।

उन्होंने कहा कि उन्होंने तय किया है कि अब से हर माह की 7 तारीख को उपवास करेंगी।

उन्होंने कहा कि अब उपवास के धागे में सभी को बांधना होगा। उपवास केवल भोजन का त्याग नहीं है, बल्कि इसके साथ वाणी संयम और नियंत्रण का भी उपवास होना चाहिए। किसी को गलत न बोलें, अपशब्द न कहें और अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें। जब हम हर महीने उपवास के माध्यम से मन और तन को शुद्धि की ओर ले जाएंगे, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

 

उन्होंने कहा कि आज देश में नई पीढ़ी और युवाओं की चर्चा हो रही है। यदि युवा स्वयं को आगे बढ़ाना चाहते हैं और राष्ट्र के लिए कुछ करना चाहते हैं तो सबसे पहले उन्हें स्वयं और अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण करना सीखना होगा। उपवास इसी आत्मनियंत्रण का माध्यम बन सकता है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह पूरी दुनिया में योग दिवस मनाया जाता है, उसी तरह हमें हर महीने उपवास के पर्व को भी व्यापक रूप देना होगा।

खाद्यान्न संकट के समय लाल बहादुर शास्त्री ने किया था उपवास का आह्वान

चित्रा त्रिपाठी ने देश के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय भारत में खाद्यान्न का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने साधु-संतों और महापुरुषों से इस समस्या के समाधान के संबंध में मार्गदर्शन लिया। संतों ने एक समय का उपवास करने का सुझाव दिया, जिससे खाद्यान्न की बचत हो सके। इसके बाद प्रधानमंत्री ने रेडियो के माध्यम से देशवासियों से उपवास का आह्वान किया था।

‘जब बात मन को छू जाए तो जीवन बदल देती है’—अंतर्मना प्रसन्न सागर जी

‘हर मास एक उपवास’ अभियान के सूत्रधार अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज ने कहा कि कोई बात कानों को अच्छी लगे तो उसका प्रभाव दो-चार दिन रहता है, लेकिन जब कोई बात मन को स्पर्श कर जाती है तो वह जीवन बदल देती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि हर मास एक उपवास का संबंध केवल धर्म से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, जीवन और परिवार से भी है।

उन्होंने कहा कि महीने में एक उपवास करने से व्यक्ति अनेक बीमारियों से बचाव की दिशा में आगे बढ़ सकता है। यदि हर व्यक्ति महीने में एक उपवास करने लगे तो देश में बड़ी मात्रा में भोजन की बचत हो सकती है। साथ ही बिजली, गैस और पानी जैसे संसाधनों के अपव्यय को भी कम किया जा सकता है।

उन्होंने आह्वान किया—
“परिवार की निरोगता और देश की खुशहाली के लिए हर मास एक उपवास का संकल्प जरूर लेकर जाएं।”

संतों ने भी लिया संकल्प

गणाचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर जी महाराज ने कहा कि अपने भीतर स्थित आत्मतत्व को जागृत करने में उपवास की महत्वपूर्ण भूमिका है। भीतर बैठे परमात्म तत्व को प्राप्त कर लिया जाए तो उपवास अपने आप जीवन का हिस्सा बन जाएगा।

संत डॉ. चतुर नारायण पराशर जी महाराज ने कहा कि हम संसार के भोगों को नहीं भोग रहे, बल्कि कई बार संसार ही हमें भोग रहा है। उपवास हमारी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता का हिस्सा रहा है। उन्होंने भी संतों की उपस्थिति में स्वास्थ्य के लिए हर माह एक उपवास करने का संकल्प लिया।

संत श्री शिवम साधक जी ने कहा कि ‘हर मास एक उपवास’ शब्द सुनते ही यह विचार उनके हृदय को स्पर्श कर गया। पुष्पगिरी तीर्थ की शांति और अनुशासन यहां की तपस्या और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन केवल भोजन करने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं को समझने के लिए मिला है। उन्होंने भी हर माह की 7 तारीख को उपवास करने का संकल्प लिया।

उन्होंने कहा कि 557 दिन की उपवास साधना के बाद भी अंतर्मना प्रसन्न सागर जी महाराज के चेहरे पर प्रसन्नता दिखाई देती है, तो एक दिन का उपवास हमारे लिए किसी भी प्रकार की हानि का कारण नहीं हो सकता।

महंत श्री पवन दास जी महाराज, पीठाधीश्वर हनुमानगढ़ी नैमिषारण्य, ने कहा कि पुष्पगिरी तीर्थ पर आकर उन्हें आध्यात्मिक अनुभूति हुई। उन्होंने त्रिवेणी वृक्ष का पौधरोपण करते हुए कहा कि प्रकृति की सेवा पुण्य का कार्य है। उन्होंने प्रार्थना की कि ‘हर मास एक उपवास’ अभियान को विश्व उपवास दिवस के रूप में मनाया जाए।

मुनि पीयूष सागर जी महाराज ने कहा कि जहां तपस्या की शक्ति होती है, वहां समाज नतमस्तक होता है। जीवन में ईश्वर का वास बनाए रखने के लिए हमें बस एक संकल्प करना है—हर मास एक उपवास।

त्रिवेणी संगम का पौधरोपण कर दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

पतंजलि के प्रवक्ता एस.के. तिजारावाला ने बताया कि ‘हर मास एक उपवास’ का यह 10वां सामूहिक उपवास आयोजन है। विश्व के करीब 200 देशों से लोग इस महाअभियान से हर महीने निरंतर जुड़ रहे हैं।

अभियान को आगे बढ़ाने और प्रकृति के संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से पुष्पगिरी तीर्थ की पहाड़ी पर पीपल, बरगद और नीम के त्रिवेणी संगम का पौधरोपण किया गया।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

आयोजन से पूर्व गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज के आशीर्वाद तथा पट्ट विभूषण आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंगलाचरण संघ के नेगम सागर जी महाराज एवं दिशी जैन ने किया। अतिथियों ने श्रीफल भेंट कर पूज्य गुरुदेव का आशीर्वाद लिया।

मुख्य वक्ता सुश्री चित्रा त्रिपाठी, महंत श्री पवन दास जी महाराज, आचार्य पंडित चतुर नारायण पराशर जी महाराज, डॉ. शिवम साधक जी, प्रदीप जी पांडे, प्रमोद जोशी, एस.के. तिजारावाला सहित अतिथियों का स्वागत पुष्पगिरी परिवार एवं स्वागताध्यक्ष तथा विधायक डॉ. राजेश सोनकर द्वारा किया गया।

इस अवसर पर सभी ने ‘हर मास एक उपवास’ अभियान की तख्ती हाथों में लेकर अभियान की प्रभावना की।

कार्यक्रम में डिप्टी कलेक्टर संजीव जैन, पुष्पगिरी सचिव सुभाष जैन, जैन समाज अध्यक्ष महेंद्र पाटोदी, कार्याध्यक्ष अशोक डोसी, समन्वयक आकाश जैन, प्रदीप जैन कानपुर, राकेश गोयल पत्रकार भोपाल, यशपाल सिंह सेंधव, विजेंद्र सिंह मानसा, निरंजन सेंगर, राजेश सेठी, संकल्प सेठी, आलोक जैन कोलकाता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन मुनि पीयूष सागर जी महाराज ने किया तथा आभार विधायक डॉ. राजेश सोनकर ने माना।

प्रचार-प्रसार संयोजक: रोमिल पाटणी, सोनकच्छ; नरेंद्र अजमेरा एवं पियुष कासलीवाल, औरंगाबाद।
प्राप्त जानकारी एवं संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *