कल जनता का फैसला: रामगंजमंडी में मुद्दे पीछे, आरोप-प्रत्यारोप आगे!
नगर पालिका चुनाव के प्रचार में बड़े नेताओं की एंट्री ने बढ़ाया सियासी तापमान, अब मतदाताओं की बारी—वे विकास चुनेंगे या दलगत राजनीति?
रामगंजमंडी।
नगर पालिका चुनाव के लिए रामगंजमंडी में कल मतदान होने जा रहा है। कई दिनों से चल रहा चुनाव प्रचार अब अंतिम दौर में पहुंच चुका है। प्रत्याशियों ने घर-घर दस्तक देकर मतदाताओं से समर्थन मांगा, सभाएं हुईं और बड़े नेताओं ने भी अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने में पूरी ताकत लगा दी। लेकिन इस पूरे चुनावी शोर के बीच एक सवाल लगातार चर्चा में है—क्या रामगंजमंडी के मूल स्थानीय मुद्दे कहीं पीछे छूट गए?
नगर पालिका चुनाव मूल रूप से सड़क, नाली, सफाई, पेयजल, रोशनी, यातायात, अतिक्रमण, पार्क, जलभराव और वार्डों की रोजमर्रा की समस्याओं से जुड़ा चुनाव माना जाता है। लेकिन जैसे-जैसे मतदान नजदीक आया, चुनावी चर्चा का केंद्र कई जगह स्थानीय समस्याओं के बजाय आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक बयानबाजी बनता दिखाई दिया।
बड़े नेताओं की सभाओं से बढ़ा चुनावी तापमान
कोटा सहित आसपास के क्षेत्रों से आए प्रमुख नेताओं ने रामगंजमंडी में अपने-अपने दल के प्रत्याशियों के समर्थन में सभाएं और प्रचार किया। इन सभाओं में स्थानीय चुनाव को व्यापक राजनीतिक लड़ाई के रूप में पेश करने की कोशिश भी दिखाई दी।
भाजपा की ओर से शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने प्रचार के दौरान निर्दलीय और दल बदलने वाले उम्मीदवारों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने चुनाव जीतने के बाद कुछ लोगों के पार्टी बदलने को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
दूसरी ओर कांग्रेस भी भाजपा सरकार और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर लगातार हमलावर नजर आई। ऐसे में चुनावी मैदान में मुद्दों की जगह राजनीतिक बयानबाजी का रंग और गहरा होता गया।
लेकिन जनता पूछ रही है—हमारे वार्ड का क्या होगा?
रामगंजमंडी का मतदाता अब मतदान केंद्र तक पहुंचने से पहले शायद यह सवाल खुद से जरूर पूछेगा कि अगले पांच वर्षों में उसके वार्ड में क्या बदलेगा?
क्या गलियों की सड़कें सुधरेंगी?
क्या नालियों और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान होगा?
क्या नियमित सफाई और कचरा उठाने की व्यवस्था बेहतर होगी?
क्या पेयजल की समस्या दूर होगी?
क्या स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक सुविधाओं पर ध्यान दिया जाएगा?
क्या बाजार और यातायात व्यवस्था सुधरेगी?
यही वे सवाल हैं जिनसे सीधे आम नागरिक का जीवन जुड़ा है।
लेकिन चुनावी मंचों पर इन स्थानीय सवालों की तुलना में राजनीतिक आरोप और एक-दूसरे पर निशाना साधने की बातें अधिक सुनाई देती रहीं।
नगर पालिका का चुनाव विधानसभा जैसा क्यों?
रामगंजमंडी के मतदाता के सामने अब एक दिलचस्प स्थिति है। पार्षद का चुनाव उसके अपने वार्ड से है, लेकिन प्रचार का बड़ा हिस्सा दलों की प्रतिष्ठा, बड़े नेताओं की छवि और प्रदेश की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई दिया।
यही कारण है कि अब यह चुनाव केवल भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला नहीं रह गया है। कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी भी मुकाबले को रोचक बना रहे हैं। वार्ड 27 में कांग्रेस प्रत्याशी पवन बाबेल के निर्विरोध चुने जाने से चुनाव से पहले ही राजनीतिक चर्चा तेज हुई थी।
आरोपों का फैसला नहीं, काम का फैसला चाहिए
चुनावी मंचों से नेता एक-दूसरे पर कितने भी आरोप लगाएं, अंतिम फैसला मतदाता के हाथ में है। जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो व्यक्ति पार्षद बनेगा, वह अगले पांच साल अपने वार्ड के लिए कितना उपलब्ध रहेगा और कितना काम करवा पाएगा?
राजनीतिक दलों की लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन नगर पालिका में चुना गया पार्षद सीधे नागरिकों के बीच काम करता है। इसलिए इस चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यही होना चाहिए कि कौन प्रत्याशी वार्ड की समस्याओं को समझता है और कौन उन्हें दूर करने की क्षमता रखता है।
अब प्रचार खत्म, जनता की बारी
कल रामगंजमंडी के मतदाता ईवीएम के सामने होंगे। आज तक प्रत्याशी और नेता बोल रहे थे, कल मतदाता बोलेगा।
राजनीतिक दल अपने-अपने दावे कर चुके हैं। नेता अपने विरोधियों पर निशाना साध चुके हैं। प्रत्याशी अपने समर्थन का दावा कर चुके हैं।
अब न भाषण चलेगा, न आरोप-प्रत्यारोप।
अब फैसला होगा मतदाता की उंगली से।
रामगंजमंडी का मतदाता किसे चुनता है—यह परिणाम आने पर सामने आएगा। लेकिन इस चुनाव का असली परिणाम केवल यह नहीं होगा कि किस पार्टी के कितने पार्षद जीते। असली परिणाम यह भी होगा कि क्या अगले पांच वर्षों में रामगंजमंडी के स्थानीय मुद्दे राजनीति के केंद्र में आते हैं या फिर चुनाव खत्म होते ही वे फिर पीछे
चले जाते हैं।
कल वोट पड़ेगा, लेकिन सवाल अगले पांच साल का है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



