शीतलधाम विदिशा – विश्व का प्रथम 108 फीट ऊँचा समवसरण
विदिशा
विदिशा में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य समयसागर महाराज के आशीर्वाद तथा निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर, मुनि श्री निस्सीम सागर और मुनि श्री संस्कार सागर महाराज के सान्निध्य में एक ऐतिहासिक निर्माण पूर्णता की ओर है।यह विश्व का प्रथम 108 फीट ऊँचा समवसरण मंदिर है, जो दसवें तीर्थंकर भगवान श्री शीतलनाथ स्वामी को समर्पित है।
धार्मिक मान्यता और ऐतिहासिक संदर्भ
जैन शास्त्रों के अनुसार विदिशा (प्राचीन भद्दिलपुर/भेलसा) वह पावन भूमि है जहाँ:भगवान शीतलनाथ गर्भ में आए उनका जन्म हुआ बाल्यकाल एवं युवावस्था व्यतीत कीदीक्षा लेकर तपस्या कीऔर कैवल्य ज्ञान प्राप्त कियामुनि श्री संभवसागर महाराज के अनुसार, जब भगवान को कैवल्य ज्ञान प्राप्त होता है, तब उनका चतुर्थ ज्ञानकल्याणक संपन्न होता है। उस समय:सौधर्म इंद्र, कुबेर को समवसरण रचना का आदेश देते हैंरत्न-मणियों से निर्मित दिव्य समवसरण की रचना होती हैभगवान कमलासन पर चतुर्मुखी रूप में विराजमान होते हैंस्वयं इंद्र 1008 नामों से सहस्त्रनाम पूजन करते हैं इसका उल्लेख आदि पुराण में आचार्य जिनसेन स्वामी द्वारा किया गया है।
समवसरण का विस्तृत क्षेत्र
ग्रंथों में वर्णित है कि उस समय का समवसरण क्षेत्र लगभग 7–8 योजन (लगभग 70 किमी) तक विस्तृत था।आज के संदर्भ में यह क्षेत्र:गंज बासौदा सांची भोपाल तक फैला माना जा सकता है।इस दृष्टि से संपूर्ण विदिशा क्षेत्र को मूल समवसरण स्थल के रूप में देखा जाता है।

निर्माण की विशेषताएँ
ऊँचाई: 108 फीट ऊपरी भाग में शाश्वत छत्र के चार विशाल पत्थर लगाए जा रहे हैं प्रत्येक पत्थर का वजन 2 टन से अधिक 100 फीट ऊँचाई पर क्रेन से स्थापित किया गयाप्रथम छत्र स्थापना का सौभाग्य स्व. सेठ राजेंद्र कुमार जैन के सुपुत्र संजय सेठ को प्राप्त हुआ जब इन विशाल पत्थरों को क्रेन द्वारा ऊपर स्थापित किया जाता है, तब जयकारों के बीच वह दृश्य अत्यंत भावपूर्ण और दर्शनीय होता है।

आगामी कार्यक्रम
15 फरवरी (रविवार) समवसरण की बेदी का शिलान्यास
इस अवसर पर श्री शीतलविहार न्यास, श्री सकल दिगंबर जैन समाज एवं समाज के अनेक पदाधिकारी और गणमान्यजन उपस्थित रहे।


आध्यात्मिक अनुभूति
मुनि श्री ने भावपूर्ण शब्दों में कहा –कल्पना कीजिए कि हम सभी उसी दिव्य समवसरण में विराजमान हैं, जहाँ भगवान शीतलनाथ स्वामी का ज्ञानकल्याणक मनाया जा रहा है।यह निर्माण केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
