23 वर्ष पुरानी दिव्य स्मृतियां हुईं जीवंत: मुनिश्री सुधासागर महाराज के सानिध्य में हुई गिरनार तीर्थ की वंदना आज भी श्रद्धालुओं के रोम-रोम में बसता है वह पुण्यपथ

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23 वर्ष पुरानी दिव्य स्मृतियां हुईं जीवंत: मुनिश्री सुधासागर महाराज के सानिध्य में हुई गिरनार तीर्थ की वंदना
आज भी श्रद्धालुओं के रोम-रोम में बसता है वह पुण्यपथ

रामगंजमंडी।
जगत पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर महाराज का जीवन केवल तप, त्याग और साधना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने तीर्थों के उद्धार, धर्म प्रभावना और प्राणीमात्र के कल्याण के लिए अनेक ऐतिहासिक अध्याय रचे। उन्हीं अविस्मरणीय अध्यायों में से एक है लगभग 23 वर्ष पूर्व (दिसंबर 2003) निकली लगभग 1600 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक गिरनार पदयात्रा, जिसकी स्मृतियां आज भी श्रद्धालुओं के हृदय में जीवंत हैं।

 

 

कोटा स्टेशन पंचकल्याणक महोत्सव के उपरांत गुरुदेव के मंगल सानिध्य में प्रारंभ हुई यह दिव्य पदयात्रा राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात से होकर पावन गिरनार तीर्थ तक पहुंची। हजारों श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा केवल पैदल चलने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, तप, संयम और गुरु भक्ति का अद्भुत अनुभव बन गई।

तीन राज्यों को जोड़ने वाली आस्था की अनोखी यात्रा 1600 km की रही

करीब 1600 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा में राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुड़े। जैसे-जैसे गुरुदेव का विहार आगे बढ़ता गया, भक्तों का कारवां भी बढ़ता गया। भीषण शीतलहर, मावठ और कठिन परिस्थितियां भी श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर सकीं। गुरुदेव की कठोर साधना और परिषह सहन करने की क्षमता सभी के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी रही।

कैथुली अतिशय क्षेत्र की पहली वंदना बनी ऐतिहासिक क्षण

इस यात्रा का सबसे गौरवपूर्ण अध्याय रहा मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले स्थित अतिशय क्षेत्र कैथुली की प्रथम वंदना। यहां विराजमान अतिशयकारी भगवान पार्श्वनाथ की दिव्य प्रतिमा का दर्शन कर गुरुदेव लंबे समय तक एकाग्र भाव से निहारते रहे। अपने प्रवचन में उन्होंने इस तीर्थ की दिव्यता और भविष्य की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा था कि यह क्षेत्र आने वाले समय में अभूतपूर्व विकास करेगा। आज उनकी वह भविष्यवाणी साकार होती दिखाई दे रही है और कैथुली तीर्थ की ख्याति निरंतर बढ़ रही है।

 

राजेश ठाई ने साझा की 23 वर्ष पुरानी अमूल्य स्मृतियां

रामगंजमंडी निवासी श्री राजेश ठाई ने इस ऐतिहासिक पदयात्रा की दुर्लभ स्मृतियां और लगभग 23 वर्ष पुराने छायाचित्र साझा किए। उन्होंने बताया कि गुरुदेव के साथ गिरनार तीर्थ की वंदना करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। उनके अनुसार यह अनंत जन्मों के पुण्य का परिणाम था कि उन्हें गुरुदेव के साथ इतनी महान तीर्थयात्रा का अवसर मिला।

गुजरात के चारों सिद्धक्षेत्र की वंदना हुई
श्री राजेश ठाई ने बताया की लगभग 1600 km की इस दिव्य अलौकिक पदयात्रा में गुजरात राज्य में आने वाले चारों सिद्धक्षेत्र की वंदना हुई जिसमें पावागढ़, पालीताना, गिरनार एवं तारंगा तीर्थ शामिल है।

महाराज श्री ने की थी गिरनार की तीर्थ की 5 वंदना
श्री ठाई ने स्मृतियों को सजोते हुए जानकारी देते हुए बताया पूज्य गुरुदेव निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर महाराज ने पावन गिरनार तीर्थ की 5 वंदना की थी मुझे एवम मेरे साथी आनंद ठोरा को 7 वंदना का पुण्य लाभ प्राप्त ।

उन्होंने बताया कि इस यात्रा का कुशल नेतृत्व संघपति के रूप में वर्तमान चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र समिति एवं अतिशय क्षेत्र कैथुली के अध्यक्ष श्री हुकुमचंद काका ने किया। उनके नेतृत्व में पूरी यात्रा अनुशासन, सेवा और भक्ति का अनुपम उदाहरण बन गई।

रामगंजमंडी के श्रद्धालुओं ने भी कमाया पुण्य लाभ

राजेश ठाई ने बताया कि इस पदयात्रा में रामगंजमंडी से उनके साथ अजय सांवला और आनंद ठोरा सहित अनेक मुनिभक्त भी निरंतर पदयात्रा करते हुए गुरु सेवा और तीर्थ वंदना का पुण्य लाभ अर्जित कर रहे थे। 1600 किलोमीटर से अधिक की इस कठिन यात्रा में कभी थकान का अनुभव नहीं हुआ, क्योंकि गुरुदेव की प्रेरणा ही ऊर्जा का स्रोत थी।

200 से अधिक पदयात्री इस पदयात्रा में शामिल रहे।
श्री ठाई ने बताया कि इस पदयात्रा में लगभग 200 यात्री शामिल रहे जिन्होंने इस पूरी यात्रा को पैदल किया जिसमें कोटा,रामगंजमंडी, बिजोलिया, आवा, अलोद,बूंदी, नसीराबाद, अजमेर, किशनगढ़, भानपुरा, गरोठ, शामगढ़, मंदसौर, प्रतापगढ़, घाटोल, बागीदौरा,कालिंजरा, दाहोद आदि स्थानों के भक्ति इसमें शामिल रहे
जिसमें प्रमुख रूप से बिजोलीया से श्री प्रेम‌ मोहीवाल, अशोक सेठिया, श्री निर्मल दुगेरिया,
नितीन पटवारी, विकास पटवारी,
आशीष पटवारी, विनीत पटवारी,
सुनील धानोप्या,पंकज बगड़ा,
मनोज सोनी, (लोकेश (पप्पू गोबा)
पारस जैन अलोद वाले कोटा
जम्बू जैन अलोद वाले कोटा
संजय जैन बालाकुंड
मनोज जैन आदिनाथ
प्रकाश जैन सीमेंट वाले

इसके साथ ही आवा से
चंदू जैन, भानु जैन, दीपेश जैन
योगेंद्र जैन योगी कोटा आदि शामिल रहे।

दिगंबर साधना का साक्षात दर्शन

राजेश ठाई ने भावुक होकर बताया कि गुरुदेव के साथ रहकर उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से दिगंबर साधना का वास्तविक स्वरूप देखा। उन्होंने कहा कि जिनका अंबर ही आकाश है, वही सच्चे अर्थों में दिगंबर हैं। गुरुदेव की निष्पृहता, निर्मोहता और कठोर तपस्या जीवनभर की प्रेरणा बन गई।

गिरनार की वंदना बनी जीवन का सबसे अमूल्य क्षण

गुजरात पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने गुरुदेव का भावभीना स्वागत किया। गिर के जंगलों के मध्य स्थित पावन गिरनार तीर्थ, जहां भगवान नेमिनाथ ने निर्वाण प्राप्त किया, वहां की वंदना सभी के लिए आध्यात्मिक अनुभूति बन गई। हजारों सीढ़ियां चढ़कर प्रकृति की गोद में बसे इस तीर्थ के दर्शन और नेमी-राजुल गुफा में गुरुदेव का ध्यान आज भी श्रद्धालुओं की स्मृतियों में अमिट है।

23 वर्ष पुराने छायाचित्र बने प्रेरणा का दस्तावेज

डिजिटल युग से बहुत पहले की इस ऐतिहासिक यात्रा के छायाचित्रों को सुरक्षित रखना और आज उन्हें समाज के सामने लाना अपने आप में प्रेरणादायक प्रयास है। इन दुर्लभ तस्वीरों के माध्यम से नई पीढ़ी भी उस दिव्य यात्रा, गुरु साधना और तीर्थभक्ति के स्वर्णिम इतिहास से परिचित हो सकेगी।

निस्संदेह, जगत पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर महाराज के सानिध्य में सम्पन्न यह ऐतिहासिक गिरनार पदयात्रा भारतीय जैन समाज के आध्यात्मिक इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है, जिसकी स्मृतियां सदैव श्रद्धा और प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

रिपोर्ट: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

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