दीक्षा देखने से भावो में विशुद्धता और परिणाम में निर्मलता आती है
मुनि श्री हितेन्द्र सागर जी
दीक्षार्थियों ने कर पात्र में आहार लेकर गणधर वलय विधान किया रात्रि को बिनोरी शोभा यात्रा निकाली गई। मुकुट सप्तमी 19 अगस्त को 39 वर्षों बाद होगी 7 दीक्षा
सीकर
प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की परंपरा के तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्मसागर जी से दीक्षित 76 वर्षीय राजकीय अतिथि 37 वर्षों से आचार्य पद पर प्रतिष्ठित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संयमी जीवन का 58 वा चातुर्मास 36 साधु सहित पारसनाथ भवन दंग की नसिया सीकर में कर रहे हैं। सभी 7 दीक्षार्थियों में क्षुल्लक श्री प्राप्ति सागर जी , क्षुल्लक श्री प्रतिज्ञा सागर जी ओर क्षुल्लिका श्री प्रदीप्त मति ने कटोरे के स्थान पर कर पात्र में आहार लिए।अन्य नवीन दीक्षार्थियों श्री नवरत्न पाटनी, श्रीमती शकुंतला देवी, ने एवं श्री महावीर एवं श्रीमती मनोरमा ने कर एवं पात्र में आहार लिया इसके पूर्व सभी दीक्षार्थियों ने आचार्य श्री एवं संघ के सभी साधुओं को आहार दिया। दोपहर को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवं संघ सानिध्य में पंडित कीर्तिश पारसोला के निर्देशन में दीक्षार्थियों ने श्री गणधर वलय की पूजन कर अष्ट द्रव्य, सामग्री श्रीफल, अनेक फल नैवेद्य, पुष्प सहित विधान पर अर्पित की। आचार्य श्री ने पूजन के मध्य चढ़ाए गये अघ्र्य में बताया कि पुजन भगवान के गुणों की करके उनके जैसा बनने की भावना की जाती हैं विधान में मंत्रोचार आचार्य श्री वर्धमान सागरजी मुनि श्री हितेन्द्र सागर जी एवं संघ के साधुओं ने किया।। आचार्य वर्धमान सागर धर्म वात्सल्य वर्षायोग चातुर्मास समिति श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर बीस पंथ आम्नाय प्रबंध समिति द्वारा सकल दिगम्बर जैन समाज सीकर के सहयोग से आयोजित दीक्षा महोत्सव में 18 अगस्त शाम को नगर के प्रमुख मार्गो से सभी नवीन दीक्षार्थियों की विशाल शोभा यात्रा प्रारंभ हुई संगीत पर सभी भाव विभोर होकर नृत्य कर रहे थे। श्रद्धालु भगवान श्री पारसनाथ ओर आचार्य श्री की जय जय करकर रहे हैं जहाँ दीक्षार्थी मुस्करा रहे थे वहीं परिजन भावुक दिख रहे थे जुलूस मार्ग पर स्थान स्थान पर न केवल जैन समाज अपितु अन्य समाज ने भी गोद भरकर दीक्षा की अनुमोदना कर पुण्य अर्जित किया। इसके पूर्व प्रातः कालीन धर्म सभा में प्रवचन में मुनि श्री हितेन्द्र सागर जी ने बताया कि दिगंबर साधु की दीक्षा बहुत अधिक सातिशय पुण्य से देखने को मिलती है।यह चतुर्थ कालीन चर्या निभाने वाले आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का समवशरण है जिसमें दीक्षा देखने से भावों में विशुद्धता और परिणाम में निर्मलता आती है। भगवान श्री आदिनाथ के दीक्षा प्रसंग संबंधी कथा के माध्यम से बताया कि सभी को दीक्षा संस्कार में भाग लेना चाहिए यह प्रवचन मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज आचार्य श्री धर्म सागर सभा गृह में दिया ।डा राजेश पंचोलिया के अनुसार मुनि श्री ने आगे बताया कि दीक्षार्थी का चौक पुरण अर्थात जिस स्थान पर दीक्षा संस्कार होते हैं उसे स्थान पर पवित्र कपड़े पर जिस पर आचार्य श्री स्वस्तिक का लेखन करते हैं उस पर कपड़ा बिछाने के पूर्व चावल आदि से सौभाग्यशाली महिलाएं चौक पुरण का कार्य करती है। चौक पुरण का कार्य वैसे इंद्राणी करती है। दीक्षार्थी को दीक्षा के बाद संयम उपकरण पिच्छी ,कमंडल, शास्त्र, वस्त्र ,माला आदि देने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके पूर्व श्री देशनुमति ने बताया कि दीक्षा से जीवन में परिवर्तन होता है दीक्षा साधना संयम का मार्ग है।

मुकुट सप्तमी मोक्ष कल्याणक पर श्री पारसनाथ भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा 7 जेनेश्वरी दीक्षा होगी
आचार्य वर्धमान सागर धर्म वात्सल्य वर्षायोग चातुर्मास समिति*श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर बीस पंथ आम्नाय प्रबंध समिति* द्वारा सकल दिगम्बर जैन समाज सीकर के सहयोग से श्री पारस नाथ भगवान को मोक्ष कल्याणक पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में निर्वाण लाडू चयनित पुण्यार्जक परिवारों द्वारा चढ़ाया जावेगा।इसके बाद दीक्षा समारोह होगा।जिसमें केश लोचन के बाद दीक्षा संस्कार होगे।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
