अभी का युग नारी उत्थान का है!(नारी शिक्षा- गरिमा सुरक्षा) आचार्य कनकनन्दी, अहिंसा व अपरिग्रह से ही विश्व शान्ति सम्भव न कि मात्र विज्ञान के विकास से-इसरो वैज्ञानिक डॉ. सुरेन्द्र सिंह पोखरना
सागवाड़ा
वैश्विक ज्ञान-विज्ञान के केन्द्र योगेन्द्रगिरि में विराजित विश्व धर्मप्रभावक श्रमणाचार्य श्री कनकनन्दी गुरुवर श्रीसंघ द्वारा प्राय: साढ़े तीन वर्ष से प्रवाहमान अन्तर राष्ट्रीय वेबिनार में अपने प्रबोधन में कहा किआवश्यकता ही आविष्कार की जनती है-धर्मनाशे क्रियाध्वंसे सुसिद्धान्ताथ विप्लवे !
अपृष्ठैरपि वक्तव्यं तत् स्वरूप प्रकाशने ||
वर्तमान में नारी की शक्ति-समस्या व समाधान व नारी का वैज्ञानिक सांस्कृतिक-आध्यात्मिक दृष्टि से क्या रूप है।” सव्वे सिद्धाहु सूद्धयाँसूत्र से बताया कि हर जीव रूपों की व्याख्या करते हुए गरीयसी” मातृभाषा-मातृभूमि का उदार शक्ति रूप से भगवान् है। नारी के विविध रूप में बताया कि “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि आदि का रहस्य प्रतिपादित किया ।

नारी गरिमामय प्रशस्त पक्ष की प्रतीक ब्राह्मी सुन्दरी-गार्गी- जीजामाता- चन्दना – मदर टेरेसा- फ्लोरेंस आदि का उल्लेख किया एवं इससे विपरीत नारियों का अप्रशस्त प्रतीक रूप में मन्थरा-शूर्पणखा- पूतना का उल्लेख किया। उन्होंने
कहा अभी लोकतन्त्र की सभा में एक मुख्यमन्त्री द्वारा नारी का चीरहरण हो रहा है एवं विज्ञान- शिक्षा व धर्म का भी दुरुपयोग हो रहा है।


दीपावली की पूर्व सन्ध्या पर आचार्यश्री के विनम्र सत्यग्रही
शिष्य इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सुरेन्द्रसिंह मोखरना पधारे व देश-विदेशों में चल रही धर्म-दर्शन-विज्ञान व जिनशासन की प्रभावनाकी जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में व्याप्त विकृतियों का समाधान जैनधर्म के अहिंसा-अपरिग्रह व अनकान्त जैसे सिद्धान्तों में निहित है।




विज्ञान के विकृतरूप के परिणाम स्वरूप यूक्रेन-हमास रूस में चल रहे युद्ध व विज्ञान के ज्ञान की सीमा आदि नकारात्मक पक्ष बताते हुए कहा कि जितना भौतिक विकास रूप में परिगृह का बैंक बैलेंस बढ़ रहा है उतना ही कर्मबन्ध भी बढ़ रहा है, जिससे दुःख विषमताव अशान्ति का प्रसार हो रहा है। उन्होंने कहा कि ज्ञान-विज्ञान की यथार्थ परिभाषा जानना भी अनिवार्य है।।
विजयलक्ष्मी गोदावत से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
