मुनि श्री भाव सागर महाराज ने पाश्चात्य संस्कृति से दूर रहने के साथ कहा की जन्मदिन पर केक काटना हिंसा का समर्थन है।

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मुनि श्री भाव सागर महाराज ने पाश्चात्य संस्कृति से दूर रहने के साथ कहा की जन्मदिन पर केक काटना हिंसा का समर्थन है।
घाटोल
नगर के वासपूज्य दिगंबर जैन मंदिर में पूज्य मुनि श्री भाव सागर महाराज ने पाश्चात्य संस्कृति पर करारा कटाक्ष करते हुए कहा कि पाश्चात्य संस्कृति से दूर रहना चाहिए इस पर उन्होंने विशेष बोलते हुए कहा कि पश्चिमी सभ्यता की वजह से लोग भारतीय संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।

 

 

 

 

उन्होंने प्रीवेडिंग पर भी करारा कटाक्ष करते हुए कहा कि पाश्चात्य संस्कृति भारतीय संस्कृति पर हावी होती जा रही है और लोग प्रीवेडिंग कर रहे हैं जो गलत परंपरा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया की लोग बुढ़ापे में दूसरी बार शादी कर कर वरमाला डाल रहे हैं बारात निकाल रहे हैं जो कि गलत है। उन्होंने विशेष अवसर पर धार्मिक क्रियाएं व तीर्थ यात्रा करने की नसीहत सभी को दी।जन्मदिन के समय पर मोमबत्ती जलाकर केक काटना मुनि श्री ने पाश्चात्य संस्कृति बताई केक आदि काटना हिंसा का समर्थन करने जैसा है। उन्होंने जन्मदिन पर आप कितने साल के हो गए हैं उतने कलशों के द्वारा अभिषेक करना चाहिए और इतने दीपक से प्रभु की आरती करनी चाहिए। इसके साथ ही शास्त्र दान, तीर्थ वंदना , धार्मिक कार्य, गौशाला में दान आदि गरीब व्यक्तियों को वस्त्र फल भोजन औषधि आवश्यक सामग्री दान करनी चाहिए।

 

 

महापुरुषों को महानता के चरम शिखर पर लाने में नारियों की महती भूमिका रही है।

 

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महाराज श्री ने नारी के विषय में कहा कि भारतीय संस्कृति की नारी को विशिष्ट गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त हैं। यदि किसी महापुरुष को महानता के शिखर पर पहुंचाने में किसी की महती भूमिका है तो वह नारी की है। महाराज श्री ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की विश्व प्रसिद्ध कृति मूक माटी महाकाव्य का जिक्र करते हुए कहा कि इस महाकाव्य में नारी को उभयकुल वर्धनी का गया है। वह पीहर व ससुराल दोनों कुल का वर्णन करती हैं। अगर नारी संस्कारवान है तो देश समाज परिवार का वातावरण स्वर्ग जैसा हो जाता है। इसीलिए कहा जाता है कि यदि नारी संस्कारवान होती है तो सभी जगह वातावरण अच्छा हो जाता है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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