आर के पुरम त्रिकाल चौबीस दिगम्बर जैन मंदिर में सिद्ध महामण्डल विधान का मुनि श्री आदित्य सागर महाराज सानिध्य में हो रहा आयोजन सोलह गुणों से युक्त सिद्धपरमेष्ठी भगवान की आराधना हुई सम्पन्न
कोटा।
शाश्वत अष्टान्हिका महापर्व के तृतीय दिवस सिद्धशिला पर विराजमान सिद्ध परमेष्ठी के सोलह गुणों की पूजा अर्घ देकर सम्पन्न की गई। जिसमें उनके अनन्त दर्शन, ज्ञान अवगाहनत्व, अनंत वीर्यत्व, अव्याधत्व आदि अनंत गुणों से युक्त सिद्धस्वरूप को नमस्कार किया गया ।
प्रतिष्ठाचार्य डॉ.अभिषेक जैन ने सम्पूर्ण अनुष्ठान संगीतमय कराकर उन्होंने सिद्ध परमेष्ठी के गुण धर्म की आध्यात्मिक शास्त्रीय विवेचना की।

मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि परम पूज्य श्रुतसंवेगी मुनि श्री आदित्य ‘ सागर मुनिराज ने शास्त्र वाचना कर षटलेश्याओ के स्वरूपं की विवेचना के अंतर्गत कृष्ण लेश्या के स्वरूप की आगमोक्त विवेचना की।
उन्होंने बताया कि अत्यधिक क्रोध करने से, परस्पर बैर रखने से परिणामो में दुष्परिवर्तन हो जाता हैँ जिसे जैन आगम में कृष्ण लेश्या की संज्ञा दी गई है। इस प्रकार के भावो को रखने से पर जीव को नरक के दुःखों में प्राप्त होते है।




मंगलवार को सिद्ध परमेष्ठी की 32 गुणों युक्त आराधना प्रात 7:00

बजे जिनाभिषेक शान्तिधारा, नित्यमहपूजन जन, नंदीश्वर पूजन व सिद्धचकृविधान सम्पन्न किया जायेगा । इस अवसर पर राजमल पाटोदी,विनोद काला,विनोद जैन टोरड़ी,अनुज जैन,महावीर अजमेरा,संजय जैन,श्रीपाल जैन,अशोक पाटनी सहित कई लोग उपस्थित रहे।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट9929747312
