120 से अधिक श्रद्धालुओं ने की पदमपुरा व गोलोक धाम तीर्थ की वंदना, आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज के दर्शन से अभिभूत हुआ मित्तल परिवार

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120 से अधिक श्रद्धालुओं ने की पदमपुरा व गोलोक धाम तीर्थ की वंदना, आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज के दर्शन से अभिभूत हुआ मित्तल परिवार

 

कोटा। तीर्थ वंदना और संतों के दर्शन का अवसर मिलना अपने आप में दुर्लभ पुण्य संयोग माना जाता है। वहीं जब पूरा परिवार और बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ तीर्थ यात्रा कर संतों के सान्निध्य का लाभ प्राप्त करें, तो यह यात्रा आध्यात्मिक अनुभूति के साथ सेवा, समर्पण और श्रद्धा का उत्सव बन जाती है।

 

ऐसा ही एक अविस्मरणीय और आध्यात्मिक अवसर मित्तल परिवार के लिए आया, जब श्री मिथुन मित्तल के संयोजन में 120 से अधिक श्रद्धालुओं ने पदमपुरा तीर्थ एवं गोलोक धाम तीर्थ की वंदना की। यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालुओं को तपोभूमि प्रणेता एवं पर्यावरण संरक्षक परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज के दर्शन और मंगल आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला।

 

तीर्थ वंदना और गुरु दर्शन से भावविभोर हुए श्रद्धालु

 

पदमपुरा तीर्थ और गोलोक धाम तीर्थ की वंदना के बाद आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। यात्रियों ने कहा कि सुव्यवस्थित प्रबंधन, अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण के कारण यह यात्रा उनके जीवन की स्वर्णिम और कभी न भूलने वाली स्मृतियों में शामिल हो गई।

गुरु दर्शन के साथ गौशाला एवं जीवदया-परोपकार की भावना से जुड़े कार्यों को देखकर भी श्रद्धालुओं का मन गदगद हो गया। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर गुरुदेव का वर्षायोग होता है, वहां जीवदया, गौसेवा और परोपकार के कार्य समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

 

मित्तल परिवार को मिला अभिषेक, शांतिधारा और गुरु चरण प्रक्षालन का सौभाग्य

 

यह यात्रा उस समय और भी विशेष एवं भावपूर्ण बन गई, जब मित्तल परिवार को भगवान श्रीजी के अभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

 

यात्रा में पुरुष एवं महिला श्रद्धालु विशेष ड्रेस कोड में अनुशासन और गरिमा के साथ शामिल हुए। पुरुष वर्ग श्वेत परिधान में तथा महिला वर्ग लहरिया परिधान में नजर आया। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था, अनुशासन और पारिवारिक एकता की सुंदर झलक देखने को मिली।

 

इसके बाद श्री मिथुन मित्तल एवं परिवार को आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। गुरु चरणों का स्पर्श पाकर परिवार के सदस्य भावविभोर हो उठे। संध्या बेला में मित्तल परिवार को गुरुदेव की मंगल आरती करने का भी अवसर मिला। परिवार के लिए यह क्षण श्रद्धा और भावनाओं से भर देने वाला रहा।

 

आचार्य श्री ने की सेवा और समर्पण की सराहना

 

परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज ने श्री मिथुन मित्तल एवं संपूर्ण मित्तल परिवार के सेवा, श्रद्धा और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्रद्धा, सेवा और समर्पण का यही भाव धर्म को जीवन से जोड़ता है। उन्होंने मित्तल परिवार से इसी प्रकार श्रद्धा, भक्ति, सेवा और आस्था के साथ आगे भी धर्म एवं समाज की सेवा करते रहने की भावना व्यक्त की।

 

कोटा पहुंचकर मुनिश्री योगसागर महाराज के भी लिए आशीर्वाद

 

तीर्थ वंदना यात्रा के पश्चात कोटा पहुंचने पर समस्त श्रद्धालुओं ने कोटा दादाबाड़ी जैन मंदिर में विराजमान निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 योगसागर महाराज के भी दर्शन किए तथा मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा केवल तीर्थ दर्शन तक सीमित नहीं रही, बल्कि गुरु दर्शन, जीवदया, सेवा, परोपकार और आध्यात्मिक संस्कारों से जुड़ी एक प्रेरणादायी यात्रा बन गई।

 

मिथुन मित्तल के सेवा समर्पण से जुड़ा है विशेष रिश्ता

 

उल्लेखनीय है कि श्री मिथुन मित्तल मूल रूप से रामगंजमंडी निवासी हैं और वर्तमान में कोटा में रहते हैं। आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज के कोटा चातुर्मास के दौरान उन्हें वर्षायोग के मुख्य कलश का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ था। उन्होंने गुरुदेव के कोटा प्रवास के दौरान तन-मन-धन से सेवा एवं आयोजन में सहयोग किया।

 

इसके साथ ही गुरुदेव के सान्निध्य में कोटा से स्वस्तिधाम जहाजपुर तक निकाली गई ऐतिहासिक पदयात्रा के प्रमुख संयोजकों में भी श्री मिथुन मित्तल की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

 

मित्तल परिवार की इस तीर्थ वंदना यात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जब श्रद्धा के साथ सेवा, समर्पण के साथ अनुशासन और भक्ति के साथ परोपकार जुड़ता है, तो कोई भी धार्मिक आयोजन एक यादगार आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है।

 

अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी की रिपोर्ट

मो.: 9929747312

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