युवा शक्ति को डंडे से नहीं, प्रेरणा से दिशा दें : मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज

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युवा शक्ति को डंडे से नहीं, प्रेरणा से दिशा दें : मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज

 

बोले मुनि श्री—शक्ति युवाओं को उग्र बना सकती है, प्रेरणा उन्हें परिवर्तन की राह दिखाएगी; तकनीक के साथ ‘जीवन जीने की तकनीक’ भी सीखना जरूरी

 

गिरिडीह/श्री सम्मेद शिखरजी।

राष्ट्र संत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने युवा पीढ़ी, विशेषकर वर्तमान में चर्चित ‘जेन जी’ और उसके आंदोलित स्वरूप को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। सांयकालीन शंका-समाधान कार्यक्रम में मुनि श्री ने कहा कि “युवा को डंडे के बल पर बदलना संभव नहीं है। युवा को दिशा देकर सही रास्ते पर लाना ही सबसे अच्छा कदम है। हम शक्ति से नहीं, प्रेरणा से परिवर्तन लाएं। शक्ति उन्हें उग्र बनाएगी और प्रेरणा उन्हें परिवर्तित करेगी।”

 

 

मुनि श्री यह उत्तर सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी पवन जैन के सवाल पर दे रहे थे। पवन जैन ने वर्तमान युवा पीढ़ी के आंदोलनों और उसकी दिशा को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल सहित विभिन्न देशों में युवा आंदोलित होकर सत्ता व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में भारत में भी पुलिस और प्रशासन के सामने यह सवाल है कि युवाओं से संवाद किया जाए या बल का प्रयोग किया जाए।

    

‘जेन जी’ के नाम से युवा को समझना पर्याप्त नहीं

 

37 वर्षों तक पुलिस सेवा में रहे पवन जैन ने कहा कि उन्होंने युवाओं के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है। आज की युवा पीढ़ी तकनीकी रूप से बेहद सक्षम और स्मार्ट है, लेकिन यदि वह धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों से दूर होकर केवल तकनीक और सोशल मीडिया तक सीमित हो गई तो यह समाज, धर्म और राष्ट्र के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

 

इस पर मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि यह अत्यंत ज्वलंत और महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि ‘जेन जी’ शब्द के अत्यधिक प्रचार को लेकर भी विचार करने की आवश्यकता है। युवा पहली बार आंदोलित नहीं हुआ है। इतिहास गवाह है कि दुनिया में जब भी बड़े परिवर्तन हुए, उनमें युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

 

उन्होंने कहा कि आज हर आंदोलन को ‘जेन जी’ से जोड़कर देखा जा

रहा है, लेकिन पीढ़ियों के नाम बदलने से युवा का मूल स्वभाव नहीं बदलता। परिवर्तन प्रकृति का नियम है और इसे स्वीकार करना चाहिए।

 

“युवा को पलट दें तो ‘वायु’ बनता है”

 

मुनि श्री ने युवा शक्ति की तुलना ऊर्जा से करते हुए कहा कि “युवा को पलट दें तो ‘वायु’ बनता है और वायु की दिशा जिस ओर होती है, पूरा वातावरण उसी दिशा में प्रभावित होता है। इसलिए युवा शक्ति को सही दिशा देना आवश्यक है।”

 

उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को देखकर केवल चिंतित होने के बजाय उससे उम्मीद रखने की जरूरत है। व्यापार, कॉरपोरेट, सेवा, तकनीक और अनेक क्षेत्रों में युवाओं ने अपनी प्रतिभा और क्षमता का परचम लहराया है। आवश्यकता इस बात की है कि हम युवाओं की शक्ति, मानसिकता और बदलते समय के अनुरूप उनकी मनोवृत्ति को समझें।

 

आंदोलन के कारण समझें, युवाओं को भड़काने से बचें

 

मुनि श्री ने कहा कि युवाओं के आंदोलित होने के कारणों को समझना होगा। जहां व्यवस्था में कमी है, उसे स्वीकार कर सुधार किया जाना चाहिए। राजनीतिक स्वार्थ के लिए युवाओं को भड़काने अथवा उनका इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

 

उन्होंने स्पष्ट कहा—“युवाओं को सही दिशा दीजिए, समाज बहुत आगे बढ़ेगा।”

 

तकनीक के साथ जीवन जीने की तकनीक भी जरूरी

 

तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर मुनि श्री ने कहा कि तकनीक जीवन के लिए उपयोगी साधन है, लेकिन केवल तकनीक से जीवन नहीं चलता। युवाओं को तकनीक के साथ जीवन जीने की तकनीक भी सीखनी होगी।

 

उन्होंने कहा, “तकनीक का इस्तेमाल करो, लेकिन जीवन जीने की तकनीक भी सीखो। कितनी ही एडवांस टेक्नोलॉजी आपके पास क्यों न हो, जीवन की अपनी तकनीक है और उसे सीखना जरूरी है।”

 

मुनि श्री ने कहा कि बच्चों के हृदय में आध्यात्मिक निष्ठा, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना का विकास किया जाए तो यही युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसी युवा शक्ति से कभी वीर भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे राष्ट्रभक्त निकले थे।

 

परिवार, समाज और शिक्षण संस्थाएं निभाएं जिम्मेदारी

 

मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि युवाओं के हृदय में राष्ट्रभक्ति जगाने, उन्हें सही प्रेरणा देने और उनकी क्षमताओं को सकारात्मक दिशा में लगाने की आवश्यकता है। यदि युवा शक्ति को सही दिशा नहीं मिली तो यही ऊर्जा विप्लव का कारण भी बन सकती है।

 

उन्होंने परिवार, समाज, शिक्षण संस्थाओं और व्यवस्था से आह्वान किया कि सभी मिलकर युवा पीढ़ी को समझें और उसे सकारात्मक दिशा देने के लिए गंभीरता से प्रयास करें।

 

गुणायतन में तीन दिवसीय भोजन व्यवस्था

 

गुणायतन एवं श्री सेवायतन के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि 17, 18 एवं 19 अगस्त को विद्या प्रमाणिक समूह, दिल्ली की ओर से गुणायतन के नवीन परिसर में तीन दिवसीय भोजन व्यवस्था की गई है।

 

सांयकालीन शंका-समाधान कार्यक्रम भी गुणायतन के नवीन परिसर, निहारिका के समीप, शाम 6 बजे से आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि विद्या प्रमाणिक समूह, दिल्ली द्वारा तीर्थयात्रियों के लिए स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था की गई है। सभी श्रद्धालुओं से पधारकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया गया है।

 

अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ से प्राप्त जानकारी

संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी

मो.: 9929747312

 

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