संस्कारो से मानव महा मानव बन जाता हैपवित्र आत्माओं के महोत्सव मनाए जाते है। मुनिश्री भावसागर महाराज
घाटोल
वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर मे परम पूज्य सर्वश्रेष्ठ साधक
आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य
मुनिश्री विमलसागर , मुनिश्री अनंतसागर , मुनिश्री धर्मसागर , मुनि श्री भावसागर महाराज के सानिध्य में धर्म सभा का आयोजन हुआ।
धर्म सभा को करते हुए,मुनि भाव सागर महाराज ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की 51000 किमी से ज्यादा पदयात्रा हो चुकी है,पंचकल्याणक महोत्सव अच्छे से संपन्न करना है पूरे भारत से लोग आएंगे और आप सभी को व्यवस्था करना है, यह कार्य किसी एक व्यक्ति का नहीं है सभी को मिलकर के करना है, प्रभु का रथ सभी के घरों के आगे से निकलना चाहिए जिससे बीमार, वृद्ध लोगों को प्रभु के दर्शन हो सके, मांगलिक कार्यों में वस्त्र नए पहनते हैं लेकिन कुछ लोग प्रतिदिन पूजन आदि के कार्यों में कटे फटे वस्त्र पहनते हैं यह अमंगल का प्रतीक है, भगवान के लिए परोपकार गौशाला आदि के लिए जो दान दिया जाता है उसका उपयोग उन्हीं कार्यों में करना चाहिए ,जो दान बोलकर राशि नहीं देते हैं उनको बहुत सी बीमारियां, परेशानियां आती है, पंचकल्याणक महोत्सव में आत्मा से परमात्मा बनते है,संस्कारो से मानव महा मानव बन जाता है, पवित्र आत्माओं के महोत्सव मनाए जाते है,मानव जीवन के हितार्थ व आत्मिक शांति की प्राप्ति हेतु प्राणी मात्र के कल्याणार्थ यह किए जाते है,यह तीर्थंकर प्रभु के जीवन का जीवंत प्रस्तुति करण है,




इसमें मंत्रो भक्तियो,अनुष्ठान के माध्यम से प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होती है, इसमें श्रद्धा,समर्पण,संयम एवं तप के द्वारा गुणों का आरोपण किया जाता है,भगवान का जन्म होते ही समस्त दिशाएं,आकाश निर्मल हो जाता है,शीतल सुगंधित हवा बहने लगती है, शंखनाद,भेरीनाद,सिंहनाद, घंटानाद होता है,
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
