तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध आहार दान देने से होता है मुनि श्री हितेंद्र सागर जी सीकर में होगी 7 दीक्षा
सीकर
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित पारस भवन दंग की नसिया बजाज रोड सीकर में विराजित हैआचार्य वर्धमान सागर धर्म वात्सल्य वर्षायोग चातुर्मास समितिश्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर बीस पंथ आम्नाय प्रबंध समिति द्वारा सकल दिगम्बर जैन समाज सीकर के सहयोग से राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज द्वाराआगामी 19 अगस्त को सात सप्त ऋषियों को जैनेश्वरी दीक्षा दंग की नसिया पारस नाथ भवन परिसर सीकर में प्रदान की जावेगी।पूर्व से दीक्षित क्षुल्लक श्री प्राप्ति सागर जी एवं श्री प्रतिज्ञा सागर जी मुनि, एवं क्षुल्लिका श्री प्रदीप्त मति जी द्वारा आर्यिका दीक्षा ग्रहण की जावेगी। प्रतिमा धारी अणुवृत्ति श्री नव रत्न पाटनी जयपुर, श्री महावीर जैन बनेठा, श्री शकुंतला देवी कोठिया एवं श्री मनोरमा जैन सनावद को आचार्य श्री सिद्ध हस्त कर कमलों से दीक्षा प्रदान करेंगे
इस अवसर पर 3 दिवसीय कार्यक्रम में अनेक धार्मिक अनुष्ठान होगे।आचार्य श्री धर्म सागर सभागृह में मुनिश्री हितेन्द्र सागर जी ने बताया कि भगवान से यही प्रार्थना करना चाहिए कि मेरे दुख कर्म नष्ट हो मुझे बोधी ,समाधि ,ज्ञान मिले भगवान के गुण मुझे प्राप्त हो धार्मिक कार्य श्रद्धा विश्वास आस्था से करना चाहिए श्रद्धा मजबूत होना चाहिए दूषित या मैली नहीं होना चाहिए त्रिलोकी नाथ की कृपा से सब कार्य होते हैं इसके लिए मन वचन काय से भक्ति एकाग्रतापूर्वक करना चाहिए धार्मिक उदाहरण में बताया कि चंदना ने महामुनिराज महावीर स्वामी का पड़गाहन किया तो अतिशय से रुखा सुखा भोजन भी व्यंजनों से परिपूरित हो गया।

जैसा भगवान चर्या करते थे,आशीर्वाद देते हैं वैसा ही आचार्य श्री वर्धमान सागर जी चतुर्थ कालीन चर्या निभाकर आशीर्वाद देते हैं। अशुद्ध भोजन अशुद्ध पानी से शरीर रोगी होता है शुद्ध भोजन से शरीर स्वस्थ रहता है डा राजेश पंचोलिया के अनुसार मुनि श्री ने आगे बताया कि पानी की बूंद जब सीप में गिरती है तो वह मोती बन जाता है ,सर्प के मुंह में जाने से विष बन जाता है भगवान का अभिषेक जल डालने से वह पावन गंधोंधक बन जाता है। इसीलिए कहा गया है जैसा पियो पानी, वैसे निकले वाणी। आचार्य श्री के कमंडल का पानी भी औषधि समान है सभी को खान-पान वेशभूषा में जैन कुल की मर्यादा नहीं भूलना चाहिए तीर्थंकर प्रकृति का बंध आहार दान से होता है ।श्रीकृष्ण भगवान ने आहार दान दिया तो उन्होंने तीर्थंकर प्रकृति का बंध किया।आहार दान से अनेक लक्ष्मी प्राप्त होती है, दुर्लभ से दुर्लभ वस्तु भी मिलती है।
डा राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312
