परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधा सागर महाराज का दमोह जिले में हुआ प्रवेश भारतीय संस्कृति मानवता का अनुसरण करती है, मुनिश्री
मडियादो
परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव 108 श्री सुधा सागर महाराज का दमोह जिले में प्रवेश हो गया। दमोह जिले के मडियादो में

महाराज श्री का मंगल आगमन हुआ तो, नगर का वातावरण धर्ममय हो गया, सभी ने महाराज श्री की अभूतपूर्व आगवानी की। जगह जगह महाराज श्री का मंगल पाद प्रक्षालन भी किया गया।
पूज्य महाराज श्री ने अपनी अमृतवाणी से कृतार्थ करते हुए कहा कि भारत की अखंडता, एकता और विश्व शक्ति बनने के पीछे भारतीय संस्कृति है।
और यह संस्कृति मानव की देन है। क्योंकि मानव मात्र ही वह योनि हे जो प्रकृति के उसूलों को मानकर भगवान के विधि विधान मानकर संस्कृति का निर्माण करता है। भारतीय संस्कृति मानवता का अनुसरण करती है।



महाराज श्री ने कहा कि विज्ञान मानव वादी सिद्धांत पर कार्य करता है। जबकि हमारा देश ऋषि, संत धर्म मानवतावादी है। उन्होंने कहा कि विश्व में भारत एक मात्र देश है जो मानवतावाद को मानता है। भारत देश संत महात्मा की भूमि है। और यह सभी सूर्य चंद्रमा के समान है। सभी के लिए समान, प्रकाश, शीतलता प्रदान करते हैं। इसी तरह संत महापुरुष भी सर्व सुखी, सर्व कल्याण की भावना रखते हैं।
कड़ी पीड़ा वक्त करते हुए महाराज श्री ने कहा कि गाय हिंदुओं के पास होती है, वह कसाई तक कैसे पहुंचती इस पर विचार करें। कसाई को गाय मत दो, गोवंश की रक्षा के लिए भारतीय यह नियम बना ले, गोवंश ने जिस घर में जन्म लिया उसी घर में वह आखिरी सांस लेगी। वह दिन दूर नहीं, जब अपने आप कसाईखाने बंद हो जाएंगे। बचा हुआ समय, बचा हुआ भोजन, मन और धन मत दान करो, क्योंकि ऐसा कर कि आप अपमान कर रहे होते है। सबसे पहले समय धर्म को दे।
उन्होंने भारत देश के विषय में कहा की सभी लोग प्रातः मंदिर जाते हैं, क्योंकि सबसे पहले समय धर्म को बाद में अन्य कुछ। राम लक्ष्मण संवाद के माध्यम से महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्री राम सर्वोच्च पूज्य, और विश्वभर में आराध्य है, क्योंकि उन्होंने ईश्वर होकर मानव जीवन जिया। और मानव जीवन में आने वाले कष्टों को सहकर मानवता और धर्म संस्कृति का मार्ग दिखाया। वनवास की दौरान जनकनंदिनी की खोज के दौरान राजा सुग्रीव की करुण पुकार सुनी और अपना दुख भूलकर सुग्रीव की मदद की। मतलब अपने दुखों को भूलकर दूसरों का दुख समझा। यही उनके हर संप्रदाय में सर्वोच्च, आराध्य और पूज्य होने का मूल कारण है।
महाराज श्री ने कहा कि मानव ने जिस दिन अपने दुख भूलकर दूसरो के दुख दूर करना शुरु कर दिया, समझ लो उसने श्री राम को समझ लिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

