कॉकरोच पार्टी’ से मिली जीवन की बड़ी सीख, बच्चों की सफलता से ज्यादा जरूरी हैं संस्कार : अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
‘ऊंची सोच, कड़ी मेहनत और पक्का इरादा’ सफलता की कुंजी; वहीं जीवन में आगे बढ़ने के लिए ‘सुनना, सहना और झुकना’ भी सीखना जरूरी
पुष्पगिरी, सोनकच्छ।
जीवन में बड़ी सीख हमेशा बड़े-बड़े उपदेशों से ही मिले, यह जरूरी नहीं है। कई बार छोटी-सी घटना भी जीवन का ऐसा संदेश दे जाती है, जो वर्षों तक याद रहता है। पुष्पगिरी में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज ने ‘कॉकरोच पार्टी’ के प्रसंग के माध्यम से जीवन, सफलता, संस्कार और चरित्र का गहरा संदेश दिया।
आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में इतना संघर्ष करो और स्वयं को इतना सक्षम बनाओ कि यदि कभी तुम्हारे बच्चे असफल हो जाएं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए तुम्हें किसी दूसरे बच्चे का उदाहरण देने की आवश्यकता न पड़े।
उन्होंने कहा कि कोई भी देश या राष्ट्र केवल अपने बच्चों की असफलता से नहीं गिरता, बल्कि तब असफल होता है, जब उसके बच्चे नैतिकता, व्यवहारिकता, सदाचार और संस्कारों के मूल्यों को खो देते हैं।
दुर्व्यवहार को सफलता का रास्ता मानना सबसे बड़ी विफलता
आचार्य श्री ने युवाओं को चेताते हुए कहा कि यदि कोई युवा यह सोचता है कि दुर्व्यवहार, दुराचार, अपशब्दों की बौछार और नफरत फैलाकर वह सफलता के शिखर तक पहुंच सकता है, तो यह केवल उसकी नहीं, बल्कि घर-परिवार और शिक्षा-संस्कारों की भी बड़ी विफलता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल पढ़ाई और करियर की शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें नैतिक, धार्मिक, व्यवहारिक और विनम्र जीवन के साथ भारतीय संस्कृति के संस्कारों से भी परिचित कराना जरूरी है।
बच्चों को नैतिकता और मानव सेवा का पाठ पढ़ाएं
आचार्य श्री ने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम अपने बच्चों को नष्ट होती नैतिकता, गुम होते आदर्श, विलुप्त होती मानव-सेवा की भावना तथा लुप्त होती आगम-साहित्य परंपरा से परिचित कराएं और उनमें इन मूल्यों के संस्कार विकसित करें।
उन्होंने कहा कि जीवन की वास्तविक सफलता क्रोध की ऊंची आवाज में नहीं, बल्कि चरित्र और संयम के शिखर तक पहुंचने में है।
सफलता के लिए तीन मंत्र, जीवन में टिके रहने के तीन सूत्र
आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने बच्चों और युवाओं के जीवन को दिशा देने वाले सरल लेकिन प्रभावशाली सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए बच्चों के मन में तीन बातें दृढ़ता से बैठानी चाहिए—
1. ऊंची सोच
2. कड़ी मेहनत
3. पक्का इरादा
वहीं जीवन में सफलता को बनाए रखने और समाज में सम्मानपूर्वक आगे बढ़ने के लिए तीन और बातें सीखना जरूरी है—
1. थोड़ा सुनना सीखो।
2. थोड़ा सहना सीखो।
3. थोड़ा झुकना सीखो।
आचार्य श्री ने कहा कि यदि व्यक्ति इन बातों को अपने जीवन में उतार ले, तो सफलता के साथ-साथ जीवन में शांति, सम्मान और संतुलन भी प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने प्रेरक अंदाज में कहा—
“ऊंची सोच रखो, कड़ी मेहनत करो, इरादा पक्का रखो; और जीवन में थोड़ा सुनना, थोड़ा सहना तथा थोड़ा झुकना सीख लो—फिर कर लो दुनिया मुट्ठी में बंद।”
इस अवसर पर बड़ी संख्या में गुरु भक्त उपस्थित रहे और आचार्य श्री के प्रेरणादायी प्रवचन का लाभ लिया।
प्रचार-प्रसार संयोजक : नरेंद्र अजमेरा एवं पियुष कासलीवाल, औरंगाबाद से प्राप्त जानकर संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





