“तुरंत त्याग का आग्रह नहीं, पहले त्यागियों के सान्निध्य में आना शुरू करें, परिवर्तन स्वयं होगा” : मुनिश्री समतासागर महाराज
कुंडलपुर में मुनिश्री समतासागर महाराज एवं मुनिश्री पवित्रसागर महाराज ससंघ के चातुर्मास कलश स्थापना समारोह में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
कुंडलपुर।
तीर्थधाम कुंडलपुर में तीर्थ क्षेत्र कमेटी के तत्वावधान में निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 समतासागर महाराज एवं मुनिश्री 108 पवित्रसागर महाराज ससंघ के पावन चातुर्मास कलश स्थापना समारोह का भव्य आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। प्रातःकाल बड़े बाबा आदिनाथ भगवान के दरबार में अभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं चातुर्मास स्थापना से जुड़े विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनिश्री समतासागर महाराज ने कहा कि जैन परंपरा में वर्षायोग और चातुर्मास का विशेष महत्व है। यह संतों के लिए साधना, स्वाध्याय, तप और आत्मानुशासन का समय है, वहीं गृहस्थों के लिए आत्मचिंतन, संयम, भक्ति और जीवन को नई दिशा देने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि वर्षाकाल में सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में अहिंसा धर्म के पालन और जीवों की रक्षा के लिए महाव्रती संत एक ही स्थान पर रहकर धर्म आराधना करते हैं।
“त्यागियों के पास आइए, परिवर्तन अपने आप होगा”
मुनिश्री समतासागर महाराज ने कहा कि जिस नगर अथवा क्षेत्र में चातुर्मास करने वाले पिच्छिधारी संत विराजते हैं, वहां धर्म की चेतना स्वतः जागृत होने लगती है। गृहस्थ भले ही स्वयं संयमी न हो, लेकिन यदि वह नियमित रूप से संयमी संतों के संपर्क और सान्निध्य में रहे तो उसके भीतर त्याग और संयम के संस्कार विकसित होने लगते हैं।
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के वचनों का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि त्यागी का सान्निध्य स्वयं त्याग की प्रेरणा देता है। किसी से तुरंत त्याग करने का आग्रह नहीं है। पहले त्यागियों के पास आना शुरू करें, उनके जीवन को देखें और समझें—परिवर्तन धीरे-धीरे अपने आप होने लगेगा।
“ग्रंथ पढ़ो या न पढ़ो, लेकिन खुद को जरूर पढ़ो”
युवाओं को संदेश देते हुए मुनिश्री ने कहा कि प्रतिभा और उत्साह की युवाओं में कोई कमी नहीं है, लेकिन सही मार्गदर्शन के अभाव में अनेक युवा तनाव और मानसिक अशांति से जूझ रहे हैं। उच्च शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं बढ़ने के बावजूद जीवन में शांति का अभाव दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि इच्छाओं की समीक्षा, अनुशासित दिनचर्या, भावनाओं पर नियंत्रण और श्रेष्ठ संगति ही वास्तविक सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
मुनिश्री ने युवाओं से कहा, “ग्रंथों को पढ़ो या न पढ़ो, लेकिन खुद को जरूर पढ़ना चाहिए।” उन्होंने सम्यकदृष्टि और मिथ्यादृष्टि के अंतर को समझाते हुए कहा कि दोनों संसार में रहते हैं, लेकिन उनके देखने और समझने का दृष्टिकोण अलग होता है।
आचार्य विद्यासागर महाराज की दिव्य दृष्टि का किया स्मरण
मुनिश्री समतासागर महाराज ने समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का स्मरण करते हुए कहा कि आचार्य श्री ने कभी किसी व्यक्ति का बायोडाटा या कुंडली देखकर उसका मूल्यांकन नहीं किया। उनकी दिव्य दृष्टि व्यक्ति की पात्रता, संस्कार और भावों को पहचान लेती थी और उसी अनुरूप उसका मार्गदर्शन करती थी।
25 से अधिक महिला मंडलों ने पूजन में की सहभागिता
चातुर्मास कलश स्थापना समारोह में मंगलाचरण एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। देशभर से आए 25 से अधिक महिला मंडलों ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर महाराज की पूजन में सहभागिता करते हुए अर्घ्य समर्पित किए।
कलश स्थापना में प्रमुख कलश का सौभाग्य कवीश जैन, बड़े बाबा कलश का सौभाग्य प्रशांत जैन, ज्ञान कलश का सौभाग्य चंद्रकुमार जैन तथा गुरुवर छोटे बाबा कलश का सौभाग्य उत्तमचंद जैन को प्राप्त हुआ। इसके साथ ही अनेक श्रद्धालुओं ने भी विभिन्न कलश स्थापित करने का पुण्यार्जन किया।
प्रतिष्ठाचार्य विनय बंडा के निर्देशन में कलश स्थापना के धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। कार्यक्रम का संचालन अमित पड़रिया एवं अजय अहिंसा ने किया।
देशभर से पहुंचे श्रद्धालु
चातुर्मास कलश स्थापना समारोह में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचे। सागर, दमोह, हटा, पथरिया, जबलपुर, कटनी, सतना, ललितपुर, बीना, अशोकनगर, विदिशा, भोपाल सहित अनेक नगरों से आए श्रद्धालुओं ने समारोह में सहभागिता कर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कुंडलपुर में चातुर्मास के शुभारंभ के साथ ही आगामी महीनों में धर्म, साधना, स्वाध्याय और आत्मचिंतन की विविध गतिविधियों से तीर्थ क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण और अधिक सघन होने की उम्मीद है।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
मोबाइल : 9929747312




