आर्यिका श्री विज्ञान मति जी का 42 वा दीक्षा दिवस मनाया गया पंचेंद्रीय के विषय भोग से बचें आर्यिका विज्ञानमति
आरोन।
मेवाड़ गौरव ज्येष्ठ श्रेष्ठ परम् पूज्य आर्यिका 105श्री विज्ञानमति माताजी का 42वा दीक्षा दिवस उदयपुर राजस्थान में भक्ति भाव से मनाया गया।जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक 12 के क्षेत्रीय प्रवक्ता सुनील झंडा ने जानकारी देते हुए बताया कि दीक्षा दिवस के इस मंगल अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई। इसके पश्चात्य पानी को कैसे सुरक्षित रखा जाए इस विषय पर एक सुंदर नाटिका प्रस्तुत की गई जिसमें पानी को व्यर्थ में न बहाया जावे इसका समसामयिक संदेश सभी उपस्थित जनों को दिया गया।
इस नाटिका के मंचन से प्रभावित होकर कार्यक्रम में शामिल श्रद्धालुओं ने संकल्पित लेते हुए सभी लोगों को अपने अपने घरों में पानी के टंकी में एक अलार्म लगाने का संकल्प भी लिया जिससे पानी भर जाने पर जल का अपव्यय न हो एवं पानी की बर्बादी न हो।


आर्यिका श्री विज्ञान मति माताजी को शास्त्र भेंट करने का सोभाग्य बड़ी माताजी के गृहस्थ जीवन के परिजन हाथी परिवार भिंडर बालों को प्राप्त हुआ। इसके साथ साथ बाहर से आए अतिथियों के द्वारा आर्यिका संघ को चारों अनुयोगों के शास्त्र भी भेंट किए गए।


राजस्थान के उदयपुर में आयोजित इस भव्य आयोजन में आरोन के श्रद्धालु भी शामिल हुए। आरोन जैन समाज की ओर से गोलू झंडा, नीतेश कालादेव एवं डॉ.सुधीर जैन ब्रदर ने आर्यिका श्री विज्ञान मति माताजी से आगामी समय में आरोन में चातुर्मास एवं बर्षायोग का निवेदन भी किया।
इस अवसर पर संघस्थ आर्यिका श्री आदित्य मति माताजी ने अपने प्रवचनों के माध्यम से उपस्थित लोगों को डिब्बा बंद एवं पैक्ड फूड से बचते हुए शुद्ध आहार करने की सीख दी। उन्होंने कहाकि यदि आप डिब्बा बंद एवं पैक्ड फूड का सेवन करते हैं तो आपको शाकाहारी कहलाने का कोई अधिकार नहीं है।
इस अवसर पूज्य बड़ी माताजी आर्यिका श्री विज्ञान मति माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए अपने धार्मिक सदोपदेश देते हुए कहाकि वर्तमान में पंचेंद्रीय के विषय भोग के साधन ही सबको आकर्षित कर रहे हैं क्योंकि हमारे आचार्यों ने भी कहा है कि पंचम काल में लोग विषय भोग की ओर ही ज्यादा आशक्त होंगे। और विषय भोग और पंचेंद्रिय की इस भोग प्रवृति के कारण ही वाह्य क्रियाओं में हिंसा भी अधिक होगी। आर्यिका श्री विज्ञान मति माताजी ने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहाकि आज प्रायः देखने में आ रहा है कि धार्मिक स्थानों को भी व्यवस्थापक सुख सुविधाओं एवं भोग विलास के स्थान की तरह विकसित करने लगे हैं।
जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।
इस कार्यक्रम में अलग अलग प्रांतों के श्रद्धालु उदयपुर पहुंचे और दीक्षा दिवस में शामिल हुए।
