48 मंगल कलशों के साथ जिनशासन तीर्थ में हुआ मुनिश्री निष्पक्ष सागर एवं निस्पृह सागर महाराज का चातुर्मास कलश स्थापना समारोह 8,000 वर्गफुट में बनेगा भव्य ‘आचार्य विद्या–समय सागर सभागार’, 40 कमरों सहित होगा जिनवाणी की गूंज का नया केंद्र

धर्म

48 मंगल कलशों के साथ जिनशासन तीर्थ में हुआ मुनिश्री निष्पक्ष सागर एवं निस्पृह सागर महाराज का चातुर्मास कलश स्थापना समारोह

 

8,000 वर्गफुट में बनेगा भव्य ‘आचार्य विद्या–समय सागर सभागार’, 40 कमरों सहित होगा जिनवाणी की गूंज का नया केंद्र

 

अजमेर।

 रविवार की पावन बेला में अजमेर के जिनशासन तीर्थ पर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के परम शिष्य एवं परम पूज्य आचार्य श्री 108 समयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री 108 निष्पक्ष सागर महाराज एवं मुनिश्री 108 निस्पृह सागर महाराज के वर्षायोग चातुर्मास की भव्य कलश स्थापना विधिविधान एवं धार्मिक वातावरण के समारोह में कुल 48 मंगल कलश स्थापित किए गए। इनमें 45 कलशों की स्थापना करने वाले पुण्यशाली परिवारों की घोषणा पूर्व में ही की जा चुकी थी, जबकि तीन प्रमुख कलशों के पुण्यार्जक परिवारों की घोषणा समारोह स्थल पर हुई।

 

तीन प्रमुख कलशों की स्थापना का मिला सौभाग्य

सम्यक दर्शन कलश स्थापित करने का सौभाग्य अजय जैन एवं विजय जैन परिवार को प्राप्त हुआ। वही सम्यक ज्ञान कलश एवं सम्यक चरित्र कलश की स्थापना का पुण्य लाभ अनिल जैन, श्रेयांश जैन, देवेंद्र जैन एवं धीरेंद्र जैन सुथनिया परिवार को प्राप्त हुआ।

 

संतों का सानिध्य केवल सौभाग्य नहीं, आत्मकल्याण का अवसर : मुनिश्री निष्पक्ष सागर

 

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री 108 निष्पक्ष सागर महाराज ने कहा कि संतों का सानिध्य मिलना केवल सौभाग्य नहीं, बल्कि आत्मकल्याण का अवसर है।

 

उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान केवल धार्मिक आयोजनों में शामिल होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि धर्म को अपने जीवन और व्यवहार में उतारना आवश्यक है। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र ही जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाले मूल आधार हैं।

 

मुनिश्री ने कहा कि आज मनुष्य धन, पद और प्रतिष्ठा की दौड़ में लगा हुआ है, लेकिन आत्मकल्याण, संस्कार और आत्मचिंतन के लिए समय कम होता जा रहा है। चातुर्मास हमें अपने जीवन को भीतर से बदलने, आत्मचिंतन करने और धर्म को आचरण में उतारने का अवसर प्रदान करता है।

 

8,000 वर्गफुट में बनेगा ‘आचार्य विद्या–समय सागर सभागार’

 

जिनशासन तीर्थ, अजमेर में पूज्य मुनिश्री निष्पक्ष सागर महाराज की पावन प्रेरणा से 8,000 वर्गफुट का विशाल प्रवचन सभागार निर्मित किया जाएगा। इसका नाम ‘आचार्य विद्या–समय सागर सभागार’ रखा गया है।

 

सभागार में 40 कमरों का निर्माण भी प्रस्तावित है। इस निर्माण कार्य का प्रमुख सौभाग्य परम मुनिभक्त अजय धनगसिया परिवार को प्राप्त हुआ है।

 

यह विशाल सभागार आने वाले समय में जिनवाणी के प्रचार-प्रसार, धार्मिक आयोजनों एवं आध्यात्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा। जिनशासन तीर्थ में बनने वाला यह सभागार निश्चित रूप से जिनवाणी की गूंज और जिनशासन की प्रभावना को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।

 

विधायक अनिता भदेल सहित जनप्रतिनिधियों ने लिया संतों का मंगल आशीर्वाद

 

चातुर्मास कलश स्थापना समारोह में विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र की हस्तियों ने भी पहुंचकर मुनि संघ का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

इस अवसर पर विधायक अनिता भदेल, शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल, पूर्व आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़, निवर्तमान डिप्टी मेयर नीरज जैन, सुरेंद्र सिंह शेखावत सहित अनेक समाजसेवी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने गुरुदेव का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया और आयोजन में अपनी सहभागिता निभाई। अतिथियों का समाज की ओर से आत्मीय एवं भव्य स्वागत किया गया।

हाड़ौती से पहुंचे 500 से अधिक श्रद्धालु

 

भव्य कलश स्थापना समारोह में हाड़ौती अंचल से भी 500 से अधिक श्रद्धालुओं ने पहुंचकर सहभागिता की। विशेष रूप से रामगंजमंडी एवं भवानीमंडी से बड़ी संख्या में भक्तजन समारोह में शामिल हुए। समीपवर्ती भानपुरा से भी श्रद्धालुओं का समूह अजमेर पहुंचा।

 

मुनिश्री संघ के जिनशासन तीर्थ पर वर्षायोग प्रवास से क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं का मानना है कि संतों के सानिध्य से जिनशासन की प्रभावना को नई ऊंचाई मिलेगी और अजमेर का यह तीर्थ आने वाले समय में देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा।

 

ज्ञानोदय तीर्थ के बाद जिनशासन तीर्थ भी बनेगा आध्यात्मिक पहचान का केंद्र

 

अजमेर की धार्मिक पहचान को नई ऊंचाई देने में विभिन्न तीर्थ क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पूज्य गुरुदेव सुधासागर महाराज की प्रेरणा से निर्मित ज्ञानोदय तीर्थ अपनी आध्यात्मिक आभा बिखेर रहा है। वहीं अब जिनशासन तीर्थ में मुनिश्री निष्पक्ष सागर महाराज एवं मुनिश्री निस्पृह सागर महाराज के चातुर्मास प्रवास तथा प्रस्तावित विशाल सभागार के निर्माण से इस क्षेत्र की धार्मिक गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

 

आने वाले समय में श्रद्धालु दोनों तीर्थों के दर्शन एवं धार्मिक आयोजनों में सहभागिता कर पुण्यार्जन करेंगे और जिनशासन की प्रभावना को और अधिक विस्तार मिलेगा।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

 

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