गणित और संख्या के बिना अधूरी है दुनिया, अंक विद्या की शुरुआत भगवान आदिनाथ से हुई : आर्यिका स्वास्तिभूषण माताजी”

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गणित और संख्या के बिना अधूरी है दुनिया, अंक विद्या की शुरुआत भगवान आदिनाथ से हुई : आर्यिका स्वास्तिभूषण माताजी”

**केशवरायपाटन।

अतिशय क्षेत्र केशवरायपाटन में भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वास्तिभूषण माताजी ने मंगलवार को आयोजित धर्मसभा में गणित, संख्या और गणना के आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक महत्व पर प्रेरणादायी प्रवचन देते हुए कहा कि समस्त विश्व की व्यवस्था गणित और संख्या के ज्ञान पर आधारित है। उन्होंने बताया कि दो और दो चार का सिद्धांत केवल भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड में समान रूप से लागू होता है। मध्यलोक, ऊर्ध्वलोक और अधोलोक—सभी स्थानों पर सिद्धांत एक ही रहता है।

 

आर्यिका माताजी ने कहा कि कर्मों के आठ प्रकार हैं और यह व्यवस्था प्रत्येक लोक में समान रूप से विद्यमान है। जैन आगमों में वर्णित मेरु पर्वत, अकृत्रिम जिनालय, लोक-विज्ञान तथा अनेक दिव्य जानकारियाँ भी गणना और संख्या विज्ञान के माध्यम से ही ज्ञात होती हैं।

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उन्होंने बताया ।कि गणित और अंक विद्या का प्रारंभ प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के समय से माना जाता है। कर्मभूमि की स्थापना के साथ भगवान आदिनाथ ने मानव समाज को कर्म का उपदेश दिया तथा 72 कलाओं का ज्ञान प्रदान किया। उनकी पुत्रियों ब्राह्मी को ब्राह्मी लिपि तथा सुंदरी को अंक विद्या का शिक्षण दिया गया। इसी काल से गणना और संख्या ज्ञान का विकास प्रारंभ हुआ।

 

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संख्या के ज्ञान से संचालित है पूरी दुनिया

आर्यिका श्री ने कहा कि 1 से 9 तक के अंकों का ज्ञान आज करोड़ों-अरबों लोगों की आजीविका का आधार बना हुआ है। आधुनिक विज्ञान, व्यापार, बैंकिंग, संचार और तकनीक सभी गणित पर आधारित हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया में करोड़ों मोबाइल नंबर होने के बावजूद हमारा फोन उसी व्यक्ति तक पहुंचता है, जिसे हम कॉल करते हैं। यह संख्या और गणना की अद्भुत व्यवस्था का ही परिणाम है।

उन्होंने कहा कि व्यवहार और धर्म, दोनों में संख्या का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। जैन दर्शन का करणानुयोग भी पूर्णतः गणना पर आधारित है। कर्म व्यवस्था, लोक व्यवस्था और आध्यात्मिक ज्ञान को समझने के लिए गणित का विशेष महत्व है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को नियमित स्वाध्याय, ज्ञानार्जन और तर्कपूर्ण अध्ययन को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

— संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

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