*कोलकाता के बंगबासी में गूंजा धर्म जागृति संस्थान (राजस्थान प्रान्त) का आह्वान*
*आचार्य श्री 108 वसुनंदी महामुनिराज के 39वें वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव में राजस्थान प्रान्त के सदस्यों ने लिया संकल्प*
बंगबासी (कोलकाता)।
बंगबासी दक्षिण हावड़ा जैन समाज एवं साधु सेवा समिति, कोलकाता के तत्वावधान में रविवार को विवेक विहार, हावड़ा मिल्स क्लब हाउस परिसर में प्राकृत भाषा चक्रवर्ती परम पूज्य आचार्य श्री 108 वसुनंदी महामुनिराज ससंघ के 39वें वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव का आयोजन अत्यंत भव्य, श्रद्धामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
समारोह में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा एवं झारखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालुओं, समाजसेवियों एवं धर्मानुरागियों ने भाग लेकर गुरुदेव के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
इस अवसर पर अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान (राजस्थान प्रान्त) के अध्यक्ष पदम जैन बिलाला (जयपुर) के नेतृत्व में राजस्थान प्रान्त के पदाधिकारी, विभिन्न शाखाओं के प्रतिनिधि तथा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे। गुरुदेव आचार्य श्री वसुनंदी महाराज के पावन सान्निध्य एवं प्रेरणा से संस्थान ने धर्म संरक्षण तथा जैन समाज के सशक्त भविष्य के लिए व्यापक जनजागरण का आह्वान किया।

संस्थान ने स्पष्ट कहा कि यदि जैन धर्म की गौरवशाली परम्परा को सुरक्षित रखना है, तो प्रत्येक जैन परिवार को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित न रहकर व्यवहारिक जीवन में भी अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। इसी उद्देश्य से समाज के समक्ष अनेक महत्वपूर्ण संकल्प प्रस्तुत किए गए।
संस्थान के संयुक्त महामंत्री संजय जैन बड़जात्या (कामा) ने बताया कि संस्थान ने युवाओं को संस्कारवान बनाकर जैन समाज की जनसंख्या वृद्धि के लिए जागरूक होने का आह्वान किया। प्रत्येक जैन से अपने नाम के साथ “जैन” उपनाम लिखने तथा अपनी पहचान कभी न छिपाने का आग्रह किया गया। साथ ही बच्चों के जन्म प्रमाण-पत्र, विद्यालय प्रवेश, शैक्षणिक अभिलेखों एवं अन्य सभी सरकारी दस्तावेजों में धर्म के स्थान पर “जैन” अंकित कराने की अपील की गई।
संस्थान के कोषाध्यक्ष पंकज जैन लुहाड़िया ने बताया कि धर्म जागृति संस्थान ने समाज से विवाह जैसे महत्वपूर्ण संस्कारों में जैनेत्तर विवाह से परहेज करने तथा बेटियों एवं युवाओं में जैन संस्कारों के प्रति जागरूकता विकसित करने का आह्वान किया। साथ ही जैनेत्तर परिवारों में भी जैन संस्कृति एवं अहिंसा के संस्कारों के प्रचार-प्रसार का संदेश दिया गया।
संस्थान ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के विषय में समाज को जागरूक रहने, संतों के विहार एवं प्रवास के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा जनगणना में धर्म के कॉलम में जैन लिखने का विशेष निवेदन किया गया।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि प्रत्येक जैन मंदिर, संस्था, सोसायटी एवं देवस्थान का विधिवत पंजीकरण होना चाहिए। संस्थाओं की सम्पत्तियों से संबंधित सभी दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएँ तथा भूमि का सीमांकन कराया जाए, क्योंकि “संस्था बचेगी तो धर्म बचेगा, धर्म बचेगा तो समाज बचेगा।”
धर्म जागृति संस्थान ने सभी समाजजनों से धर्म, देव, शास्त्र एवं गुरु की रक्षा और सेवा के लिए संगठित होकर कार्य करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि “संस्कारवान समाज ही सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है। यदि आज नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत देर हो जाएगी।”
इस अवसर पर राष्ट्रीय पदाधिकारी योगेश जैन, ई. भूपेन्द्र जैन, राजकुमार सरावगी, निकुंज जैन, नीरज जैन तथा संरक्षक आर.सी. गर्ग, ओमप्रकाश काला, राकेश माधोराजपुरा, सुरेन्द्र जैन बालोतरा, महावीर जैन (पाली), संजय सर्राफ (कामा), निकिता जैन (जयपुर), बीना जैन, पवन सेठी, बबलू जैन, जिनेन्द्र जैन एवं निर्मला जैन (मुन्नी देवी) सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर संस्थान की स्मारिका का भी विमोचन किया गया।
वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री वसुनंदी महाराज के पावन सान्निध्य में धर्म रक्षा, संस्कार संवर्धन, सामाजिक एकता एवं जैन पहचान को सशक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया गया।
