प्रकृति ने मनुष्यो को सुविधा दी कि वे परम पद पा सकते हैं–मुनि पुंगव श्री सुधासागर महाराज कल होगा डबरा में मुनि पुंगव का ससंघ प्रवेश

धर्म

प्रकृति ने मनुष्यो को सुविधा दी कि वे परम पद पा सकते हैं–मुनि पुंगव श्री सुधासागर महाराज कल होगा डबरा में मुनि पुंगव का ससंघ प्रवेश
दतिया

-मां को श्रेष्ठ माना गया है इनमें तीन कारण मां को विशेष बनाते है मां ने तुम्हे कितनी बार बचाया, कितनी बार सुधारा, कितनी बार नकारा ये तीन गुण मां को सर्वश्रेष्ठ बनाते है।

श्रोताओं के पुण्य से प्रवचन निकलते हैं ना मालूम किसके पुण्य से प्रवचन में कौनसी बात निकल आये दो का पुण्य काम करता है श्रोता और वक्ता कभी कभी वक्ता के पुण्य से भी ऐसी-ऐसी शिक्षाये निकल आती है जो जीवन को बदल कर रख दें। चौरासी लाख योनियों में एक भी योनि ऐसी नहीं है जिससे सभी रास्ते खुलते हो मात्र मनुष्य पर्याय ही ऐसी है जहां से सभी ओर रास्ते जातें हैं।

 

मनुष्य पर्याय से निगोद तिर्यच देव नारकी के साथ ही नारायण पद की भी यात्रा की जा सकती हैं। ये ऐसा स्टापेज है जहां से भक्त भगवान बन सकता है। प्रकृति ने मनुष्यो को ही ये सुविधा दी है। अन्य स्थानों से जो सम्भव नहीं है उसे आप मानव पर्याय से प्राप्त कर सकते हैं।यह उद्गार मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज ने दतिया के निकट धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

 

आज डबरा समाज के साथ ही आज समाधिस्थ आचार्य ज्ञानसागर महाराज की प्रेरणा से निर्मित ज्ञान तीर्थ मुरैना की ओर से ब्रह्मचारी बहन अनिता दीदी के नेतृत्व में श्री फल भेंट कर ज्ञान तीर्थ पर चातुर्मास का निवेदन किया। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप आदित्य, प्रवीण जैन दैनिक विश्व परिवार, दाऊ शीलचंद ललितपुर सहित अन्य विशेष भक्त उपस्थित थे

*मां हमेशा गलती को माफ कर देती है*
उन्होंने कहा कि पिता सहिष्णु नहीं होता,माता सहिष्णु होता है माता कि आदत‌ होती है किं वह बेटे की गलत आदत को छुपा लेती हैं।

 

माता बच्चे के दोष को ढाकने की कोशिश करती है। यदि वह नहीं छुपा पायेगी तो वह बेटे की गलती को माफ कर देती हैं।जिनवाणी मां से द्रव्यानुयोग रुपी मां कहती है मेरे बेटा कभी गलत नही कर सकता। है,
करुणानुयोग रूपी मां कहती है इस बेटे ने किस प्रकार से कर्म ही तो किया है फिर भी वह कहती है कर्म ही तो किया कुछ नहीं है, चरणानुयोग रूपी मां कहती है गलती हो गयी कोई बात नहीं माफ कर देती है आगे नहीं करेगा।

 

 

योग के साथ उपयोग को पवित्र वनाने का प्रयास करें*
हमारे यहां योग को अपनी दैनिक क्रिया में शामिल किया गया। योग के द्वारा हम अपने शरीर की शुद्धि के साथ आत्मा की शुद्धि करने के लिए उपयोग को स्थिर करें हम अपने उपयोग को शुद्ध करेंगे तो हम अपनी आत्मा की ओर एक कदम बढ़ा सकते हैं। योग की विधियों से हमारे यहां ग्रन्थों में हजारों सूत्र सदियों पूर्व लिखें गये है सरकारी प्रयास से आज इनका प्रचार प्रसार हो रहा है होना ही चाहिए स्वस्थ जीवन के लिए सभी को योग करना चाहिए।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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