अच्छी संगति जीवन बदल देती है, मन में अहिंसा और प्रेम के फूल खिलने लगें तो समझिए सही गुरु मिल गए : अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज
सभी धर्मों के श्रेष्ठ तत्व अपनाने का संदेश, अहिंसा, करुणा, भक्ति और भाईचारे से ही सशक्त होगी मानवता
पुष्पगिरी (सोनकच्छ)।
अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि यदि किसी श्रेष्ठ संगति के प्रभाव से आपके विचार, भाव और मन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगे तथा अहिंसा, करुणा, सद्भाव, प्रेम और मैत्री के फूल खिलने लगें, तो समझ लेना चाहिए कि वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि सच्चे मार्गदर्शक हैं।
गुरुभक्तों को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य को अपनी भावनाओं का विस्तार करना चाहिए और ऐसी व्यापक सोच विकसित करनी चाहिए, जो संकीर्णताओं से ऊपर उठकर समूची मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करे। धर्म और धर्मात्मा वही है, जो सीमित हृदय को विशाल बना दे। जीवंत धर्म वही है, जिसकी धमनियों में अहिंसा, प्रेम, मैत्री और भाईचारे की धारा निरंतर प्रवाहित होती रहे।
उन्होंने कहा कि आज मानव जीवन के समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए समन्वयवादी विचारधारा को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। प्रत्येक धर्म में कुछ न कुछ ऐसी विशेषताएं हैं, जिन्हें अपनाकर जीवन को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है। यदि सभी धर्मों के श्रेष्ठ तत्वों को आत्मसात किया जाए, तो सफलता और मानव कल्याण का मार्ग और अधिक सरल हो जाएगा।
आचार्यश्री ने विभिन्न धर्मों की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जैन धर्म से अहिंसा, वैष्णव धर्म से भक्ति, बौद्ध धर्म से करुणा, इस्लाम धर्म से भाईचारा, ईसाई धर्म से सेवा और सिख धर्म से शौर्य एवं साहस सीखना चाहिए। इन सभी गुणों का समन्वय मानवता को समृद्ध बनाएगा तथा सर्वधर्म समभाव और सांप्रदायिक सद्भाव को नई मजबूती प्रदान करेगा।
यह संदेश समाज में प्रेम, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है।
✍️ संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी।9929747312
