102 डिग्री बुखार में रिंग फतह! कोटा की बेटी अरुंधति चौधरी ने जीता कॉमनवेल्थ गोल्ड, पिता के 3 दिन के उपवास ने भावुक कर दी कहानी
बुखार भी नहीं रोक सका हौसला, परिवार की प्रार्थनाएं बनीं ताकत; अब ओलंपिक गोल्ड पर नजर
कोटा।
राजस्थान के कोटा की 23 वर्षीय प्रतिभाशाली बॉक्सर अरुंधति चौधरी ने अदम्य साहस, संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल पेश करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। सबसे प्रेरणादायक बात यह रही कि अरुंधति 102 डिग्री बुखार से जूझ रही थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और रिंग में उतरकर शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत लिया।
इस ऐतिहासिक जीत के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम पर भारत का राष्ट्रगान सुनने का उनका वर्षों पुराना सपना भी साकार हो गया। गोल्ड मेडल जीतने के बाद अरुंधति ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और पूरे परिवार की प्रार्थनाओं तथा विश्वास को दिया।
उन्होंने भावुक होकर कहा, “मेरे पिता ने मेरा नाम अरुंधति रखा, जिसका अर्थ सूरज की किरण होता है। आज जो मैंने गोल्ड मेडल जीता है, उसका पूरा श्रेय मेरे परिवार के अटूट विश्वास और भगवान की कृपा को जाता है।” उन्होंने यह भी बताया कि अब उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। भारत लौटने के बाद वह सबसे पहले परिवार के साथ अपना पसंदीदा भोजन करना चाहती हैं।
15 साल की उम्र तक थीं बास्केटबॉल खिलाड़ी, पिता की सलाह ने बदल दी जिंदगी
अरुंधति 15 वर्ष की उम्र तक जूनियर स्टेट लेवल की बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं। इसके बाद उनके पिता सुरेश चौधरी ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें बॉक्सिंग अपनाने की सलाह दी। यही फैसला आज देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया।
पिता ने बेटी की जीत के लिए रखा तीन दिन का उपवास
अरुंधति की जीत के पीछे परिवार का त्याग और आस्था भी चर्चा का विषय बन गई। फाइनल मुकाबले के दिन उनके पिता सुरेश चौधरी श्रीनाथजी मंदिर में लगातार बेटी की जीत के लिए प्रार्थना करते रहे। उन्होंने लगातार तीन दिन तक अन्न ग्रहण नहीं किया। जैसे ही बेटी के गोल्ड जीतने की खबर मिली, उनकी आंखें खुशी से नम हो गईं। उन्हें पूरा विश्वास था कि उनकी बेटी देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर ही लौटेगी।
पूरे परिवार की दुआएं बनीं ताकत
फाइनल मुकाबले से पहले घर के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। अरुंधति की बहन डॉ. चारु चौधरी ने बताया कि 102 डिग्री बुखार के कारण पूरा परिवार बेहद चिंतित था, लेकिन सभी ने भगवान से लगातार प्रार्थना की। वहीं भाई शिवराज सेमीफाइनल के बाद उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर पहुंचकर बहन की जीत की कामना कर आए थे। चाचा सहित पूरे परिवार को विश्वास था कि अरुंधति देश के लिए गोल्ड जीतकर ही लौटेंगी।



