चाकसू जा रही श्रद्धालुओं से भरी बस हादसे का शिकार, टोंक जैन समाज ने सेवा और मानवता की मिसाल पेश की

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चाकसू जा रही श्रद्धालुओं से भरी बस हादसे का शिकार, टोंक जैन समाज ने सेवा और मानवता की मिसाल पेश की

कोटा से आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर जी महाराज के दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालु हुए घायल, 7 जयपुर रेफर; टोंक जैन समाज ने भोजन, उपचार और हरसंभव सहयोग की संभाली जिम्मेदारी

टोंक।
कोटा से चाकसू स्थित गोलोक धाम में आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर जी महाराज के दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं से भरी एक बस रविवार को टोंक जिले के मेंहदवास क्षेत्र के समीप सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही टोंक जैन समाज के पदाधिकारी, समाजजन और स्वयंसेवक तत्काल घटनास्थल एवं अस्पताल पहुंचे और राहत एवं सेवा कार्य शुरू कर दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बस में करीब 20 श्रद्धालु सवार थे। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि बस सड़क किनारे खड़े बजरी से भरे ट्रक से टकरा गई। दुर्घटना के बाद घायलों को तुरंत टोंक के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

 

 

जानकारी के अनुसार 7 गंभीर घायलों को बेहतर उपचार के लिए जयपुर रेफर किया गया है, जबकि 10 श्रद्धालुओं का टोंक में उपचार चल रहा है। वहीं 3 यात्रियों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सौभाग्यवश कुछ श्रद्धालुओं को केवल मामूली चोटें आईं।

सेवा में सबसे आगे रहा टोंक जैन समाज

दुर्घटना के बाद टोंक जैन समाज ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए घायलों और उनके परिजनों के लिए दलिया, खिचड़ी, पौष्टिक भोजन, पेयजल सहित आवश्यक सामग्री की तत्काल व्यवस्था की। समाज के स्वयंसेवक अस्पतालों में लगातार मौजूद रहकर मरीजों और उनके परिजनों की हरसंभव सहायता कर रहे हैं। जयपुर रेफर किए गए घायलों के परिजनों को भी आवश्यक सहयोग एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।

 

 

समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक सभी प्रभावित श्रद्धालुओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध नहीं हो जाती, तब तक सेवा कार्य निरंतर जारी रहेगा। टोंक जैन समाज की इस संवेदनशील एवं अनुकरणीय पहल की स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मुक्त कंठ से सराहना की है।

 

 

मानवता का जीवंत उदाहरण

इस दुर्घटना के बीच टोंक जैन समाज ने यह सिद्ध कर दिया कि “मानव सेवा ही ईश्वर की सच्ची उपासना है।” विपरीत परिस्थितियों में समाज की तत्परता, सेवा भावना और सहयोग ने पीड़ित परिवारों को संबल प्रदान किया। वास्तव में, “मधुबन खुशबू देता है, जीना उसका जीना है जो औरों को जीवन देता है”—यह पंक्ति टोंक जैन समाज की सेवा भावना को साकार करती दिखाई दी।

रिपोर्ट: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी।

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