सुधासागर महाराज का बड़ा संदेश: गलतियां छिपाने से नहीं, स्वीकारने से बदलता है जीवन, इंदौर चातुर्मास में उमड़े श्रद्धालु
इंदौर के दलाल बाग चातुर्मास महोत्सव में निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर महाराज ने कहा— आलोचना से डरें नहीं, उसे आत्मसुधार का अवसर बनाएं
इंदौर।
दलाल बाग में चल रहे चातुर्मास महोत्सव की धर्मसभा में शनिवार को निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर महाराज ने आत्मसुधार, सकारात्मक सोच और आत्ममंथन का प्रेरक संदेश देते हुए कहा कि “गलतियां छिपाने से नहीं, उन्हें स्वीकार कर सुधारने से जीवन बदलता है।” उनके प्रेरक प्रवचन को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मुनिश्री ने कहा कि गलती करना मनुष्य का स्वभाव है, लेकिन अपनी भूल स्वीकार न करना सबसे बड़ी कमजोरी है। जो व्यक्ति अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का साहस करता है, वही जीवन में वास्तविक सफलता और आत्मिक उन्नति प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि जो हमारी आलोचना करता है, वह हमेशा हमारा विरोधी नहीं होता। कई बार वही हमारी कमियों का एहसास कराकर हमें बेहतर बनने का अवसर देता है। इसलिए आलोचना से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर अपने व्यक्तित्व का निर्माण करना चाहिए।
धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए मुनिश्री ने कहा कि धर्म केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के बीच उसकी प्रभावना होनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग उसके आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकें।
श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियां भी सफलता की सीढ़ी बन सकती हैं। जैसे कचरे से बनी खाद खेत को अधिक उपजाऊ बना देती है, उसी प्रकार जीवन की कठिनाइयों और कटु अनुभवों को यदि सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार किया जाए तो वही आत्मविकास का सबसे बड़ा माध्यम बन जाते हैं।
सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा में देशभर से आए श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया। चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातः 8:00 से 9:30 बजे तक मुनिश्री के प्रवचन हो रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं
संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

