अपने अंदर बैठे कर्म चितेरों से डरोपुण्य का अनुसरण करने वाला कभी पाप का सहयोग नहीं करता:विज्ञमती माताजी

धर्म

अपने अंदर बैठे कर्म चितेरों से डरोपुण्य का अनुसरण करने वाला कभी पाप का सहयोग नहीं करता:विज्ञमती माताजी

ग्वालियर,
आपकी प्रभुता सत्यता में परिवर्तित हो जाए तो आपका कल्याण हो जाएगा। हमें अपने कर्तव्य पर ध्यान देना चाहिए। राग-द्वेष भौतिक मिठास हैं, लेकिन हमारे दुश्मन हैं। आपको अपने अंदर बैठे कर्म के चितेरों से डरना चाहिए, ये तुम्हें खोखला कर देते हैं। यह विचार पट्ट गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमती माताजी ने गुरुवार को चम्पाबाग बगीची में गणधर वलय स्तोत्र सेमिनार में व्यक्त किए।
माताजी ने कहा कि आप इस अनुष्ठान में अपनी गुरु की संगत में बैठे हो, फिर भी आपके परिणामों से पता चलता है कि आप पाप को सहयोग करते हो। पुण्य का अनुसरण करने वाला कभी पाप का सहयोग नहीं करता।
देवों की आराधना कराई


सेमिनार के दौरान माताजी ने कोष्ठ बुद्धि, बीज बुद्धि और पदानुसारी बुद्धि के बारे में विस्तार से समझाते हुए गणधर देवों की आराधना कराई।
ज्ञान की गंगा में डूबे श्रद्धालु


समाज के प्रवक्ता ललित जैन ने बताया कि गणधर वलय स्तोत्र सेमिनार में शामिल शिविरार्थी माताजी के सानिध्य में गणधर देवों की आराधना में इतने लीन हो गए कि इस उन्हें प्रभु की आराधना के सिवाय और कुछ दिखाई नहीं दे रहा। पूरा माहौल धर्ममय हो गया है। गुरुवार को माताजी ने कोष्ठ बुद्धि, बीज बुद्धि और पदानुसारी बुद्धि की अलग-अलग व्याख्या इतने सरल शब्दों में की कि शिवरार्थी ज्ञान की गंगा में गोते लगाते दिखाई दिए।
प्रतिदिन शिवरार्थियों की उपस्थिति दर्ज होती है


अपने अंदर बैठे कर्म चितेरों से डरोपुण्य का अनुसरण करने वाला कभी पाप का सहयोग नहीं करता:विज्ञमती माताजी के संयोजक पुरुषोत्तम जैन एवं विनय कासलीवाल ने बताया कि 16 दिवसीय इस सेमिनार में शामिल 600 शिवरार्थियों की सुबह 7 बजे उपस्थिति दर्ज की जाती है! सेमिनार के अंत में परीक्षा भी होगी और पुरुस्कार भी दिए जाएंगे! जिसमें प्रथम पुरस्कार 1 किलो चांदी के बर्तन होगे!
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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