सत्य को पूर्णतः सर्वज्ञ ही जानते है कनकनंदी गुरुदेव

धर्म

सत्य को पूर्णतः सर्वज्ञ ही जानते है कनकनंदी गुरुदेव
सागवाड़ा
योगेंद्र गिरी पर विराजित वैज्ञानिक आचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में बताया की सत्य को पूर्णतः सर्वज्ञ ही जानते हैं। है। परम सत्य को जानने के लिए मानने के लिए सत्य स्वरूप बनने के लिए ही धर्म है। जिस प्रकार तुम्हारा चित्र तुम नहीं, वैसे ही तुम्हारा शरीर तुम नहीं। तुम्हारी इंद्रिय भी तुम नहीं।

 

 

आचार्य श्री ने कहा कि वेबीनार में सत्य स्वरूप का उद्घाटन होता है। वाचनिक सत्य वह है जिससे किसी जीव का घात ना हो। सत्य बोलो अप्रिय नहीं। झूठ में भी सत्य की विशेषता होती है। मन पवित्र होने पर जो हितकर वचन बोले जाते हैं वह कटु होने पर भी सत्य हैं। कलह ना हो हिंसा ना हो इस उद्देश्य से झूठ बोलना भी सत्य है। लिंग भेद को लेकर सर्वत्र स्त्रियों का अपमान किया जाता है। नौकरी राजनीति कानून धर्म सब जगह स्त्रियों के साथ पक्षपात किया जाता है। सबसे अधिक उदार भावी श्वेतांबर है। दूसरों को कष्ट हो ऐसे व्यवहार सत्य भी नहीं बोलना चाहिए।

 

 

आचार्य श्री कुरल वाक्य ग्रंथ से पढ़ा रहे हैं। यह ग्रंथ पंचम अनुयोग है पंचम वेद है। सत्य बिना कोई धर्म नहीं होता सभी प्रकार के धर्म सत्य के छोटे-छोटे भाग हैं। आचार्य श्री कहते हैं व्यवहार सत्य नहीं जानने तो निश्चित सत्य कैसे जानोगे,? मन से पवित्र वचन बोलो मन से अपवित्र वचन भी हिंसा है। जिसका ह्र्दय पवित्र है असत्य वचन नहीं बोलते वह तीन लोक पर शासन करते हैं। मन पवित्र होना ही तीर्थ है।, मन पवित्र होना ही पुण्य है।, मन पवित्र होना ही सत्य है। ना शत्रु ना मित्र सब भेदभाव से रहित होने पर तथा समस्त कषायो से रहित होने पर भगवान पूजनीय है। भगवान स्वयं भी राजा अवस्था में पूजनीय नहीं होते हैं। जिनका मन सत्य शील है वह निमग्न है वह तपस्वयो से भी महान तपस्वी दानियों से भी महादानी महा ज्ञानी है। मानसिक असंतोष के कारण चंचलता आती है। जितना दिखावा होगा वहां सत्य नहीं होगा जितनी सरलता प्राकृतिकता होगी उतना सत्य होगा।

 

मुनि श्री सुविज्ञ सागर जी गुरुदेव ने आचार्य श्री द्वारा रचित “कहां स्वर्ग कहां नर्क तुम्हारे भाव में ही स्वर्ग नरक” कविता द्वारा मंगलाचरण किया। वेबीनार में मुनि श्री अध्यात्मनंदी सुवत्सलमति माताजी , क्षु भक्ति श्री, ब्रह्मचारी सोहन लाल ब्रह्मचारी खुशपाल जैन ब्रह्मचारिणी मंजुला देवी ब्रह्मचारिणी आशा देवी कोटा से महावीर जैन जर्मनी से अजीत जैन मुंबई से डॉक्टर रीता मुंबई से कलावती महावीर जी चितरी से मधोक शाह दीपेश मणिभद्र मंयक,हसादेवी,शकुन्तला, चन्दादेवी, संगीता दीपिका-मिनाक्षी शीतल चावंड से ललित कोठारी सागवाड़ा से प्रेरणा शाह नलिनी गोवाडिया,आनल शाह प्रेमलता सुरुचि निर्मला अरुणा उषाआदि खोडनियापरीवार , पुनर्वास कॉलोनी से नगीगजी शांति लाल जी सुमति लालजी सुरेंद्र जी प्रीति बाला चंदा देवी चेतना ज्योति मधुबाला ,दीपीका,हेमलता विजयलक्ष्मी आनंदी देवी ममता संघवी जीना संघवी टीना मासूम खुशबू अंजना निशा प्रेमिला,मनीषा शर्मिला संध्या दीदी ओबरी से कैलाशी गोदावत हेमा गोदावत विमला देवी भिलुडा से श्रीपालजी,राज कुमारी,चन्द्र लेखा,उर्वशी,हितेशजी,कमलेशजी,गुणमाला,धनपालजी उदयपुर से आचार्य श्री के परम शिष्य कृषि वैज्ञानिक श्याम लाल जी गोदावत जादूगर मुकेश गाजियाबाद से सबसे प्राचीन professor शिष्य प्रभात की धर्मपत्नी वीणा आदि
अनेक देशों शहरों तथा गांव के लोग वेबीनार का लाभ लेते हैं।

विजयलक्ष्मी जैन से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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