“जब व्यक्ति बराबरी नहीं कर पाता, तो बुराई और बदनामी का सहारा लेता है” — अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज
पुष्पगिरी सोनकच्छ में प्रेरणादायी उद्बोधन, बोले— भले लोगों का मौन ही बुराइयों की सबसे बड़ी ताकत, अब सत्य और अहिंसा के साथ अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का समय।
पुष्पगिरी सोनकच्छ।
पुष्पगिरी में आयोजित धर्मसभा में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने अपने ओजस्वी और प्रेरणादायी प्रवचन में जीवन, समाज और राष्ट्र के प्रति प्रत्येक व्यक्ति के दायित्व का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि “जब व्यक्ति बराबरी नहीं कर पाता, तो वह बुराई और बदनामी करना शुरू कर देता है।” इसलिए हमें आलोचनाओं से विचलित होने के बजाय अपने सद्कर्मों और सत्य के मार्ग पर अडिग रहना चाहिए।
आचार्य श्री ने कहा कि घर, परिवार, समाज और संघ के रिश्तों को मधुर बनाए रखने के लिए कई बार व्यक्ति को कभी अंधा, कभी बहरा और कभी गूंगा बनना पड़ता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि समाज और देश में फैली बुराइयों, विसंगतियों और अन्याय के प्रति भी मौन धारण कर लिया जाए। ऐसे विषयों पर चुप रहना समाधान नहीं, बल्कि समस्या को और बढ़ाने का कारण बनता है।
उन्होंने कहा कि समाज में बुराइयाँ इसलिए नहीं बढ़तीं कि बुरे लोग अधिक बोलते हैं, बल्कि इसलिए बढ़ती हैं क्योंकि भले और सज्जन लोग समय पर मौन रह जाते हैं। सज्जनों की यही खामोशी अक्सर दुष्ट प्रवृत्तियों की सबसे बड़ी शक्ति बन जाती है।
आचार्य श्री ने आह्वान किया कि अब समय आ गया है जब प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर भगवान महावीर, भगवान राम, भगवान श्रीकृष्ण, संत कबीर और महात्मा गांधी जैसी सत्य, साहस, करुणा और अहिंसा की चेतना को जागृत करे। हिंसा, क्रूरता, भ्रष्टाचार और हर प्रकार की सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध सत्य, नैतिकता और अहिंसा के साथ सजग एवं सकारात्मक संघर्ष ही राष्ट्र और समाज को नई दिशा प्रदान कर सकता है।
कार्यक्रम की जानकारी प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा एवं पीयूष कासलीवाल (औरंगाबाद) से प्राप्त जानकारी
समाचार संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

