ऐतिहासिक मंगल प्रवेश से धर्ममय हुआ कलिंजरा, आर्यिका 105 सिद्धश्री माताजी संघ के चातुर्मास का भव्य शुभारंभ
हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकली विराट शोभायात्रा, आर्यिका सिद्धश्री माताजी बोलीं— “वागड़ की भूमि अद्भुत और चमत्कारी, संयम ही मन को वास्तविक शांति देता है”
कलिंजरा, बांसवाड़ा।
श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के अद्भुत संगम के बीच शुक्रवार का दिन कलिंजरा के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया। जिस ऐतिहासिक क्षण की प्रतीक्षा क्षेत्रवासी लंबे समय से कर रहे थे, वह आर्यिका 105 सिद्धश्री माताजी संघ के भव्य मंगल प्रवेश के साथ साकार हुआ। बैंड-बाजों की मंगल ध्वनि, “जय जिनेन्द्र” के गगनभेदी जयघोष और हजारों श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे नगर को धर्ममय बना दिया। लगभग दो घंटे तक चली विशाल शोभायात्रा में श्रद्धा का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि नगर की हर गली धर्मभक्ति के रंग में रंग गई।

जम्मूखंड महाविद्यालय से प्रारंभ हुई मंगल यात्रा प्रताप सर्किल, होली चौक, यादव मोहल्ला, बस स्टैंड और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मार्ग से होती हुई श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर परिसर पहुँची। मार्ग में सकल दिगम्बर जैन समाज, वैष्णव समाज, सर्वसमाज, विचार परिवार तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों ने श्रीफल अर्पित कर आर्यिका संघ का भव्य स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पाद प्रक्षालन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

पूरे नगर को दुल्हन की तरह सजाया गया था। आकर्षक रंगोलियाँ, पुष्पवर्षा, भव्य स्वागत द्वार और भक्ति गीतों की मधुर स्वर लहरियों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। महिला मंडलों, नवयुवक मंडल और बालिका मंडल की गरबा, समूह नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह की भव्यता में चार चाँद लगा दिए।

मंदिर पहुँचने पर आर्यिका श्रीसंघ ने मूलनायक भगवान आदिनाथ, चौबीसी एवं भगवान बाहुबली के दर्शन कर बाहुबली परिसर में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित किया। समाज की ओर से श्रीफल समर्पित कर आर्यिका संघ से कलिंजरा में चातुर्मास सम्पन्न कराने का विनम्र आग्रह किया गया।

धर्मसभा में आर्यिका 105 सिद्धश्री माताजी ने कहा कि “वागड़ की यह भूमि अत्यंत अद्भुत और चमत्कारी है। यहां की श्रद्धा, भक्ति और धर्मभाव ने हमें चातुर्मास के लिए यहां आने को प्रेरित किया है। मैं यहां बेटी बनकर आई हूं और बेटी की तरह इस नगर को अपना घर मानते हुए चार माह तक धर्म की सुगंध फैलाने का प्रयास करूंगी।”

उन्होंने कहा कि सिद्धचक्र विधान, धर्मध्वजा स्थापना, कलश स्थापना, मुनि संघ के मिलन और धोतीधारी श्रावकों के नमोस्तु के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होना अत्यंत मंगलकारी संकेत है। साथ ही उन्होंने कहा कि संयम ही मनुष्य को वास्तविक शांति और आत्मिक आनंद प्रदान करता है।
आर्यिका संघ के मंगल प्रवेश के साथ ही कलिंजरा में 11 वर्ष पूर्व सम्पन्न हुए ऐतिहासिक मुनि संघ के चातुर्मास की स्मृतियाँ भी ताजा हो उठीं। समाज के वरिष्ठजनों ने उस गौरवशाली कालखंड का स्मरण करते हुए इस बार भी चातुर्मास को ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बनाने का संकल्प लिया। नवयुवक मंडल, महिला मंडल, बालिका मंडल एवं समाज के सभी वर्गों ने आगामी चार माह तक धर्म प्रभावना के विविध कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया।
नवयुवक मंडल अध्यक्ष सुनील शाह ने बताया कि पूरा समाज तन, मन और धन से चातुर्मास को सफल, अनुकरणीय एवं ऐतिहासिक बनाने के लिए समर्पित भाव से कार्य करेगा। कार्यक्रम का मंगलाचरण पराग घोड़ा ने किया, जबकि संचालन समाज अध्यक्ष रतनपाल दोसी एवं सुशील घोड़ा ने किया।
— सुरेशचंद नौगामा, जिला बांसवाड़ा से प्राप्त जानकारी
संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

