“सुरों का वह फ़रिश्ता, जिसकी आवाज़ कभी ख़ामोश नहीं होगी… मोहम्मद रफ़ी को भावभीनी श्रद्धांजलि”
“न फ़नकार तुझ-सा तेरे बाद आया,
मोहम्मद रफ़ी, तू बहुत याद आया…”
यह केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि करोड़ों संगीत प्रेमियों के हृदय की वह पुकार है, जो आज भी हर बार रफ़ी साहब का नाम आते ही स्वतः गूंज उठती है।
तेरा ग़म है हमको बहुत ही पुराना,
तुझे हमसे बिछड़े हुआ एक ज़माना।
मगर तेरी आवाज़ का जादू ऐसा है कि समय बदल गया, पीढ़ियाँ बदल गईं, लेकिन तेरे गीतों की मिठास आज भी वैसी ही है।
चले जाएँगे हम, मुसाफ़िर हैं सारे,
मगर एक शिकवा है लब पर हमारे।
तुझे इतनी जल्दी ख़ुदा ने बुलाया,
मोहम्मद रफ़ी, तू बहुत याद आया।
रफ़ी साहब, आपने केवल गीत नहीं गाए, बल्कि हर एहसास को अपनी आवाज़ दी। कभी प्रेम बना, कभी विरह, कभी भक्ति, कभी देशभक्ति, तो कभी इंसानियत का संदेश। आपकी आवाज़ ने हर दिल को छुआ और हर पीढ़ी को अपना दीवाना बनाया।
आज भी जब “चौदहवीं का चाँद हो”, “बहारों फूल बरसाओ”, “क्या हुआ तेरा वादा” या “मन तड़पत हरि दर्शन को आज” जैसे गीत सुनाई देते हैं, तो ऐसा लगता है मानो रफ़ी साहब हमारे बीच ही मौजूद हों। उनकी आवाज़ समय की सीमाओं से परे, अमर हो चुकी है।
मेरे दिल को फिर तड़पा गया है वो मंजर,
जब तेरी विदाई का वह दिन याद आता है।
संगीत का एक युग मानो उसी दिन ठहर गया था, लेकिन तेरे सुर आज भी हर दिल में धड़कते हैं।
न फ़नकार तुझ-सा तेरे बाद आया,
मोहम्मद रफ़ी, तू बहुत याद आया…
भारतीय संगीत के अमर गायक, सुरों के सरताज, पद्मश्री मोहम्मद रफ़ी साहब की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। ईश्वर ने उन्हें अपने पास बुला लिया, लेकिन उनकी आवाज़ को अमरत्व दे दिया। जब तक संगीत रहेगा, जब तक सुरों की दुनिया आबाद रहेगी, तब तक मोहम्मद रफ़ी का नाम सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता रहेगा।
“आवाज़ें कभी नहीं मरतीं… वे यादों, एहसासों और दिलों में हमेशा ज़िंदा रहती हैं। रफ़ी साहब भी ऐसे ही अमर हैं।”
सुरों के सरताज, महान पार्श्वगायक मोहम्मद रफ़ी साहब की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि एवं भावभीने श्रद्धासुमन।
— अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी

