चातुर्मास केवल उत्सव नहीं, संयम, साधना, शुद्धि और सिद्धि का महापर्व है — राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज

धर्म

“चातुर्मास केवल उत्सव नहीं, संयम, साधना, शुद्धि और सिद्धि का महापर्व है — राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज

मधुबन (श्री सम्मेद शिखरजी)।

राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने चातुर्मास स्थापना के पश्चात आयोजित विशाल धर्मसभा में कहा कि “चातुर्मास केवल चार माह तक एक स्थान पर निवास करने अथवा धार्मिक आयोजनों का समय नहीं, बल्कि संयम, साधना, शुद्धि और सिद्धि का महापर्व है’ मुनि श्री ने कहा यदि प्रत्येक श्रद्धालु इन चार महीनों में आत्मपरिवर्तन का संकल्प ले, तो उसका सम्पूर्ण जीवन नई दिशा को प्राप्त कर सकता है” उन्होंने कहा प्रत्येक व्यक्ति को चातुर्मास के प्रारम्भ में स्वयं से चार प्रश्न अवश्य पूछने चाहिए—चातुर्मास क्या है?क्यों है?कैसे करना है?और इस चातुर्मास में हमें क्या करना है? इन प्रश्नों के उत्तर ही चातुर्मास की वास्तविक साधना का मार्ग प्रशस्त करते हैं।उन्होंने कहा कि साधु वर्षायोग के दौरान जीव-दया,संयम और आत्मसाधना के लिएएक स्थान पर स्थिर रहते हैं।गृहस्थों को भी इस अवधि में अपने मन, वाणी, आहार, आचार और व्यवहार को अनुशासित बनाकर जीवन में संयम का विकास करना चाहिए।

 

 

 

राष्ट्रसंत ने कहा कि वास्तविक संयम केवल भोजन तक सीमित नहीं है। इस चातुर्मास में आप सभी शुद्ध एवं सात्त्विक भोजन ग्रहण करें, यथासंभव घर का भोजन करें, रात्रि भोजन, फास्ट फूड और जंक फूड का त्याग करें तथा तंबाकू, गुटखा, धूम्रपान सहित सभी प्रकार के नशों से दूर रहने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि कटु वचन भी हिंसा का स्वरूप हैं, इसलिए मधुर वाणी, विनम्र व्यवहार और क्षमाभाव को जीवन का अंग बनाना चाहिए। उन्होंनेभारतीय संस्कृति एवं धार्मिक मर्यादाओं पर बल देते हुए कहा कि धर्मस्थलों पर मर्यादित एवं पारंपरिक वेशभूषा हमारी सांस्कृतिक पहचान है। अपनी परंपराओं और धार्मिक मूल्यों पर गर्व करते हुए उन्हें व्यवहार में उतारना ही सच्ची धार्मिकता है।”साधना” की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि”केवल माला फेरने का नाम साधना नहीं है, बल्कि श्रेष्ठ जीवन-मूल्यों का निरंतर अभ्यास ही वास्तविक साधना है” नियमित भावना योग, स्वाध्याय, जप, तप और आत्मचिंतन से अंतःकरण की शुद्धि होती है तथा शुद्धि से जीवन स्वतः सिद्धि की ओर अग्रसर होता है।उन्होंने सभी श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि इस चातुर्मास को अपने जीवन की “नई शुरुआत” बनाएं, क्योंकि चार माह का अनुशासित जीवन पूरे जीवन को बदल सकता है।

 

 

 

 

गुणायतन के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि चातुर्मास की शुभारंभ बेला में राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के मुखारविंद से मुनि श्री संधान सागर महाराज,मुनि श्री सार सागर महाराज, मुनि श्रीसमादर सागर महाराज एवं मुनिश्री रूप सागर महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में 6:30 बजे से गणधर वलय विधान किया गया तत्पश्चात प्रातः 7:30 बजे अभिषेक, शांतिधारा एवं प्रवचन, दोपहर 3:00 बजे स्वाध्याय तथा प्रतिदिन सायं 6:15 बजे शंका-समाधान का विशेष आयोजन किया जा रहा है, जिसका लाभ देशभर से आए श्रद्धालु प्राप्त कर रहे हैंइसी अवसर पर राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के सान्निध्य में गुणायतन, श्री सेवायतन एवं विद्या प्रमाण गुरुकुलम् के पदाधिकारियों, शिरोमणि संरक्षकों एवं ट्रस्टियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें तीनों प्रकल्पों के विस्तार, सेवा कार्यों के सुदृढ़ीकरण तथा संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सक्रिय बनाने की भावी योजनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

 

 

 

गुणायतन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद काला (कोलकाता) ने बताया कि गुणायतन परिवार आज देश-विदेश में फैल चुका है तथा 18 हजार से अधिक सदस्य इससे जुड़े हुए हैं। बैठक में अनेक सदस्यों एवं परिवारों ने गुणायतन और श्री सेवायतन के विभिन्न सेवा एवं धर्मप्रचार प्रकल्पों के लिए उदारतापूर्वक आर्थिक सहयोग एवं दान की घोषणाएँ कीं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री काला ने सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का सम्मान करते हुए उनके समर्पण की सराहना की तथा कहा कि सेवा और धर्मकार्य को गति देने के लिए समाज का आर्थिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जिन दानदाताओं की घोषित दानराशि शेष है, उनसे शीघ्र अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण करने का आग्रह किया।

उन्होंने युवाओं से अधिकाधिक संख्या में संगठन से जुड़ने का आह्वान करते हुए बताया कि गुणायतन के प्रकल्पों को नई गति देने के उद्देश्य से गुणायतन कार्यकारी परिषद का गठन किया गया है। परिषद के अध्यक्ष रमेश सरावगी (कोलकाता), वरिष्ठ उपाध्यक्ष योगेंद्र जैन (दिल्ली) एवं प्रदीप जैन काला (रांची), उपाध्यक्ष विजय सरावगी (कोलकाता), महामंत्री सुरेन्द्र प्रीति जैन (गुवाहाटी) तथा संयुक्त मंत्री अरुण गंगवाल (रांची) नियुक्त किए गए हैं। उन्हें देशभर में समर्पित कार्यकर्ताओं की टीम तैयार कर संगठन के विस्तार की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

 

 

बैठक में बाल ब्रह्मचारी अशोक भैयाजी को गुणायतन का अधिष्ठाता तथा बाल ब्रह्मचारी अभय भैयाजी को उप-अधिष्ठाता नियुक्त किया गया।साथ ही राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने गुणायतन,श्री सेवायतन के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जनजागरण के लिएअविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ को तीनों प्रकल्पों का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त करते हुए विशेष आशीर्वाद प्रदान किया।

इसके अतिरिक्त श्री सेवायतन के अध्यक्ष पद पर विजय मंजू जैन (यू.एस.ए.),कार्याध्यक्ष चंद्र कुमार सिंघई (जबलपुर) तथा महामंत्री हर्ष अजमेरा (हजारीबाग) की नियुक्ति की घोषणा की गई।अंत में सभी दानदाताओं एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बैठक का समापन हुआ। यह संकल्प व्यक्त किया गया कि धर्म, सेवा और संस्कार के इन तीनों प्रकल्पों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाकर उन्हें राष्ट्र निर्माण के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया जाएगा।

     संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



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