इंदौर आने का सबसे पहले श्रीफल मनीष और सपना गोधा ने चढ़ाया था सुधासागर महाराज चातुर्मास का प्रथम कलश का मंगल सौभाग्य मनीष सपना गोधा ने प्राप्त किया
इंदौर
परम पूज्य गुरुदेव निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर महाराज के वर्षा योग 2026 की चातुर्मास मंगल कलश स्थापना इंदौर नगर में आज दलाल बाग परिसर में संपन्न हो गई।
इस आयोजन में भरपूर उत्साह देखने को मिला आयोजन में चातुर्मास के लिए भामाशाहों ने अपने दरबार खोल दिए एवं अविस्मरणीय अनुदान मंगल चातुर्मास स्थापना में आया।
चातुर्मास का प्रथम मंगल कलश प्राप्त करने का सौभाग्य भामाशाह युवा दंपति श्रीमान मनीष सपना गोधा एवम आनंद गोधा परिवार को प्राप्त हुआ। इस पुनीत बेला में इन दोनों परिवारों को आचार्य श्री के चरणों का पद प्रक्षालन कर उनकी चरण रज मस्तक पर लगाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस आयोजन में दोनों परिवार की श्रद्धा भक्ति समर्पण अभूतपूर्व थी।


परम पूज्य गुरुदेव ने अपने वचनों से कहा कि यदि इंदौर चातुर्मास का प्रथम श्रीफल किसी व्यक्ति ने चढ़ाया तो वह थे मनीष एवं उनकी धर्मपत्नी सपना गोधा है।
आज तक मुझसे कोई दादागिरी से बोल नहीं पाया मुनिश्री
पूज्य गुरुदेव ने विनम्र भाव से कहा आज तक मुझसे कोई दादागिरी से नहीं बोल पाया इन दोनों ने कहा था कुछ भी हो जाए मैं आपको इंदौर लेकर जरूर आऊंगा। इन्होंने महोत्सव के बाद कहा था कि मेरा एक ही टारगेट होगा कि सुमति धाम महोत्सव के बाद आपका चातुर्मास इंदौर में हो। लेकिन एक व्यक्ति से काम नहीं होता है। पूरे चातुर्मास में मेरे मन में जो भाव जगाया मेरे मन में जो उत्साह जगाया आनंद नवीन गोधा के विषय में कहा जो ढाई हजार लोगों को लेकर आनंद और नवीन गुना पहुंचे इसलिए वो सोने में सुहागा हो गया।
जो व्यक्ति दम से मुझे दावा कर सकता है निश्चित रूप से उसमें भी कुछ दम होगा मुनि श्री
मैं उस दिन से सोच रहा था जो व्यक्ति मुझसे इतने दम से दावा कर सकता है तो निश्चित रूप से उसमें कुछ दम तो होगा। दोनों ने अंतरंग भाव से मुझसे कहा था और पहली बार इन्होंने मेरे दर्शन किए थे। पहली बार ही इनका आना हुआ था और पहली बार में ही इनके ऐसे भाव हुए आनंद नवीन ने गुना में जो प्रदर्शन किया इंदौर वाले कभी इंदौर से बाहर नहीं निकले आज मुझे मालूम पड़ा आनंद नवीन का भाव बाहर से नहीं था अंदर से था।
आज वो अंदर का प्रकाश इन दोनों का था वो जगत के सामने फुटकर सामने आया यह ऊपर ऊपर की बाते नहीं थी ऊपर से नहीं था अंदर चेतना से था।
महाराज श्री ने दोनो हाथ उठाकर इन्हें आशीर्वाद प्रदान किया जैसे ही दोनों हाथ उठाकर आशीर्वाद प्रदान किया जमकर तालिया की गड़गड़ाहट और जयकारों का शोर सुनाई देने लगा। निश्चित रूप से यह कार्य बहुत ही सराहनीय है और जितनी अनुमोदना की जाए कम है।
आज के आयोजन को देखकर लगता है कि इंदौर का यह
वर्षायोग एक नया इतिहास लिखेगा जो विश्व पटल पर जैन धर्म की एक नई आभा को शोभायमान करेगा।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

