समोशरण की दिव्यता का अद्भुत वर्णन: जहाँ शेर और गाय भी साथ बैठकर सुनते हैं भगवान की दिव्यध्वनि — आचार्य सुनील सागरजी
नेमिनगर जैन कॉलोनी, इंदौर | 30 जुलाई
परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनील सागरजी महाराज ने धर्मसभा में भगवान जिनेन्द्र के दिव्य समोशरण की अलौकिक महिमा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि समोशरण ऐसा दिव्य दरबार है, जहाँ अशांति, भय, वैर और मनमानी का कोई स्थान नहीं होता। वहाँ उपस्थित प्रत्येक जीव समता, शांति और आत्मिक आनंद का अनुभव करता है।
आचार्यश्री ने कहा कि समोशरण में न भूख-प्यास का कष्ट होता है, न आधि-व्याधि का प्रभाव और न ही किसी प्रकार की शारीरिक पीड़ा। वहाँ का दिव्य, शीतल और अलौकिक वातावरण सांसारिक सुख-सुविधाओं से कहीं अधिक श्रेष्ठ एवं अनुपम होता है। यह समस्त वैभव सौधर्म इन्द्र द्वारा निर्मित तथा तीर्थंकर भगवान की पुण्य प्रकृतियों के अद्भुत प्रभाव का प्रतिफल है।
उन्होंने बताया कि समोशरण में समस्त जीव भगवान की अमृतमयी दिव्यध्वनि का श्रवण करने के लिए एकत्रित होते हैं। वहाँ करुणा, समता और अहिंसा का ऐसा अनुपम वातावरण होता है कि जन्म-जन्मांतर के शत्रु भी अपना वैर त्याग देते हैं। जैन परंपरा के अनुसार समोशरण में शेर और गाय जैसे स्वभाव से विपरीत जीव भी बिना किसी भय और हिंसा के एक साथ बैठकर भगवान की देशना का श्रवण करते हैं। यही समोशरण की दिव्यता और वीतरागता का सर्वोच्च स्वरूप है।
आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि पंचम काल में भी चतुर्थ काल जैसी चर्या वाले महान संतों का दर्शन और सान्निध्य प्राप्त होना अत्यंत दुर्लभ एवं महान सौभाग्य का विषय है। ऐसे महापुरुषों का सान्निध्य आत्मजागरण, धर्मचिंतन और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने का अनुपम अवसर प्रदान करता है।
सायंकालीन धर्मसभा में आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं की विभिन्न जिज्ञासाओं एवं शंकाओं का समाधान भी किया। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं श्रद्धा से संगीतमय महाआरती में सहभागिता कर पुण्यार्जन किया। संपूर्ण नेमिनगर जैन कॉलोनी भक्तिरस, आध्यात्मिक उल्लास और धर्ममय वातावरण से सराबोर रही।
माही जैन धीरावत से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
