भद्दलपुर विदिशा नगरी कोई साधारण भूमी नहीं है यह रत्नगर्भा भूमी हैः- मुनि श्री संभवसागर
विदिशा “चौबीस तीर्थंकरों में अधिकांश तीर्थंकर के जन्म स्थान अयोध्या नगरी है,लेकिन दसवे तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ स्वामी का अवतरण इसी भद्दलपुर नगरी विदिशा में हुआ था”
उपरोक्त उदगार निर्यापक मुनि श्री 108 संम्भव सागर महाराज ने शीतलधाम में आयोजित धर्मसभा में भगवान श्री शीतलनाथ स्वामी के जन्म और तप कल्याणक के अवसर पर व्यक्त किये। मुनि श्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में सिद्धक्षेत्र और तीर्थक्षेत्र तो बहूत है,लेकिन किसी तीर्थंकर की जन्मनगरी है तो वह भद्दलपुर विदिशा ही है यहा पर एक नहीं बल्कि गर्भ, दीक्षा और ज्ञान कल्याणक भी यही पर हुये। मुनि श्री ने कहा कि आचार्य गुरुदेव के आशीर्वाद से सामने देख रहे है कि यहा पर विशाल समवसरण बन रहा है जो कि बहूत तेजी के साथ यह कार्य पूर्ण हो जाएगा मुनि श्री कहा कि सोचो कि जब लाखों वर्षों पूर्व भगवान शीतलनाथ गर्भ में आये होंगे तो जन्म के छै माह पूर्व से सौधर्म इंद्र ने रत्नों की वर्षा की और यह वर्षा एक दो दिन नहीं बल्कि 15 माह तक लगातार होती रही तो यह भूमी कोई साधारण भूमी नहीं है यह रत्नगर्भा भूमी है।

उन्होंने 2002 की ओर सभी का ध्यान खींचते हुये कहा कि पहली बार आचार्य गुरुदेव विदिशा आये और उन्होंने संपूर्ण विदिशा नगरी के साथ साथ उदयगिरी तक गये लेकिन उनके चरण जब इस भूमी पर पड़े तो उनको इस भूमी पर जो ऊर्जा दिखी और इसी भूमी पर चरण रुक गये मुनि श्री ने कहा कि जैसे भगवान शीतलनाथ ने अपनी आत्मा को पवित्र किया हम भी उनका अनुसरण कर अपनी आत्मा को पवित्र करें। मुनि श्री ने कहा कि यह उत्सव यह कल्याणक इसीलिये आते है,जिससे हम भी अपनी आत्मा का परीक्षण कर पवित्र और निर्मल कर सकें। 






प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया शीतलधाम में तीन दिवसीय उत्सव का आज शुभारंभ दसवें तीर्थंकर भगवान श्री शीतलनाथ स्वामी के जन्म कल्याणक के साथ हुआ आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागरजी महामुनिराज एवं विद्यानिधी आचार्य समयसागर महामुनिराज के परम आशीर्वाद से निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभव सागर महाराज मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज मुनि श्री संस्कार सागर महाराज ऐलक श्रीगौरव सागर महाराज के सानिध्य में प्रातः7 बजे स्टेशन जैन मंदिर से रथयात्रा कड़कड़ाती ठंड के गंजबासोदा से आये रथ के साथ शुरु हुई रथ पर भगवान श्री शीतलनाथ स्वामी को विराजमान किया गया एवं शोभायात्रा रेल्वे स्टेशन रोड़ से शीतलधाम की ओर बढ़ चली आगे आगे बेंड बाजे थे वही भगवान शीतलनाथ स्वामी की जयजयकार के साथ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज और आचार्य श्री समयसागर महाराज की जयघोष से सुबह सुबह जब लोग सोकर के भी नहीं उठे थे वही जैन समाज के महिलामंडलों एवं समाज बंधुओं ने जयजयकार से विदिशा शहर को गूंजायमान कर दिया।
सभी महिलामंडल अपने अपने ड्रेस कोड में थी एवं भगवान की भक्ती में नाचते और गाते हुये चल रही थी वंही कुछ मंडलों ने डांडिया नृत्य की प्रस्तुति भी दी। शोभायात्रा में विद्यासागर युवक मंडल का दिव्यघोष मुनिसंघ के आगे आगे नेतृत्व कर अपनी शोभा बिखेर रहा था शोभायात्रा नौ बजे शीतलधाम पर पहुंची यहा पर श्रद्धालुओं ने मुनि श्री का पादप्रक्षालन किया।तथा भगवान को बड़े मंच पर विराजमान किया गया भाग्यशाली परिवारों ने अभिषेक एवं 108 शांतिमंत्रों के साथ शांतीधारा संपन्न हुई तथा सभी श्रद्धालुओं ने 1008 कलशों से भगवान का जलाभिषेक किया इस अवसर पर बाल ब्र.तरुण भैया इंदौर ने अपने अंदाज में संचालन कर उपस्थित जन समुदाय का मन मोह लिया तथा नगर गौरव अनूप भैया ने मंच संचालन में सहयोग किया।
इस अवसर पर शीतलविहार न्यास एवं सकल दि. जैन समाज के समस्त पदाधिकारी एवं टृस्टी गण तथा बहूत बड़ी संख्या में युवाओं की उपस्थिती थी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
